मई में 12 लाख से ज्यादा भक्तों ने कराया मुंडन! तिरुपति बालाजी में बाल चढ़ाने के पीछे क्या है असली वजह?
आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर में मई में 12 लाख से अधिक भक्तों ने बाल दान किए, जो एक ...और पढ़ें

भगवान वेंकटेश्वर को क्यों दान किए जाते हैं बाल? (AI Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के तिरुमाला में स्थित दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में शामिल भगवान वेंकटेश्वर के तिरुपति बालाजी मंदिर में इस साल मई के महीने में आस्था का अनोखा सैलाब देखने को मिला। जहां मात्र 27 दिनों में (1 मई से 27 मई के बीच) 12.43 लाख से ज्यादा भक्तों ने अपने बालों का दान किया।
तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के अनुसार, गर्मी की छुट्टियों और वीकेंड की भारी भीड़ की वजह से यह अब तक सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। लेकिन क्या आपको पता है कि, आखिर मंदिर में आने वाले भक्त अपने बाल का दान क्यों करते हैं? आइए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक और आध्यात्मिक वजह?
तिरुपति बालाजी मंदिर में केश दान से जुड़ी पौराणिक कथा?
तिरुपति बालाजी मंदिर में केश दान से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं, लेकिन वैष्णव ग्रंथ के अनुसार, भगवान विष्णु की तीन पत्नियां हैं, जिनका नाम लक्ष्मी जी, भू देवी और नीला देवी है। आंध्र प्रदेश के तिरुमला में स्थित नीलाद्री हिल्स नीला देवी को समर्पित है।
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भगवान वेंकटेश्वर को बाल अर्पित करने वाली पहली भक्त नीलादेवी थीं। भगवान श्रीनिवास ने इस पर्वत का नाम उनके नाम नीलाद्री पर रखा था। बताया जाता है कि, एक चरवाहे ने भगवान श्रीनिवास के सिर पर प्रहार किया, तो उनके सिर का एक छोटा-सा हिस्सा गंजा हो गया। उस स्थान पर बाल नहीं उग रहे थे और यह गंधर्व राजकुमारी नीलादेवी ने देखा। उन्होंने सोचा कि इतने सुंदर चेहरे में किसी भी तरह का दोष नहीं होना चाहिए।
उन्होंने फौरन अपने बालों का एक हिस्सा काटकर अपनी शक्ति से उनके सिर पर लगा दिया। किसी भी स्त्री के लिए बाल उसकी सुंदरता का हिस्सा होती है, इसलिए भगवान श्रीनिवास ने उनके बलिदान को देखा और कहा कि, तिरुपति में भक्तों द्वारा उन्हें दिए गए सभी बाल नीलादेवी के हैं।
बालों का दान अहंकार के त्याग का प्रतीक
तिरुपति बालाजी मंदिर में भगवान को अपने बाल अर्पित करने का मतलब अहंकार के त्याग का प्रतीक माना जाता है। यहां आने वाले कई भक्त जिनमें महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल हैं, अपने बालों का दान करते हैं। रोजाना एक टन से ज्यादा बाल एकत्र होते हैं। इन बालों को मंदिर प्रशासन द्वारा निलामी के जरिए बेचा जाता है।
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