बिना लंका जाए ही उर्मिला ने कैसे जीता युद्ध? पढ़ें निद्रा देवी के उस वरदान की अनसुनी कहानी
लक्ष्मण के वनवास के दौरान उर्मिला ने 14 वर्षों तक निद्रा का त्याग कर उनके कर्तव्य को आसान बनाया। उनका यह बलिदान न केवल राम-सीता की सेवा में सहायक रहा, बल्कि मेघनाद के वध में भी महत्वपूर्ण साबित हुआ।
-1786860565376_m.webp)
रामायण काल में उर्मिला की नींद से जुड़ा अहम बलिदान
HighLights
लक्ष्मण के लिए 14 साल तक सोईं उर्मिला।
नींद की देवी ने दिया उर्मिला को आशीर्वाद।
मेघनाद वध में उर्मिला का अहम योगदान।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण काल में कई ऐसे प्रमुख पात्रों का योगदान देखने को मिला, जिसने हिंदू धर्म के अत्यंत महत्वपू्र्ण महाकाव्य रामायण को सबसे खास बनाने का काम किया। इन्हीं प्रमुख पात्रों में से एक थी लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला जिन्होंने 14 साल तक सोना स्वीकार किया, ताकि लक्ष्मण जी प्रभु श्रीराम और माता सीता की सेवा कर सकें।
जब लक्ष्मण जी भगवान राम और माता सीता के साथ वनवास जाते हैं, तब उनकी पत्नी उर्मिला अयोध्या में ही रहीं। पहली नजर में ऐसा दिखाई दे सकता है कि, रामायण में उनकी भूमिका बस इतनी ही थी, लेकिन असल में उनका बलिदान किसी भी तरह से छोटा नहीं है।
कहानी बताती है कि, लक्ष्मण जी ने 14 सालों तक गहरी नींद त्याग दी ताकि वे हर समय जागकर राम और सीता की रक्षा सकें। बदले में उर्मिला ने उनकी नींद का भार अपने ऊपर ले लिया।
-1786859850988.webp)
उर्मिला ने चुना शांतिपूर्ण बलिदान
जब लक्ष्मण ने रामजी के साथ वनवास जाने का निश्चय किया, तो उर्मिला ने भी अपने पति के साथ जाने की इच्छा जताई। यह स्वाभाविक भी था, क्योंकि मां सीता भी राम जी के साथ जा रही थीं, तो उर्मिला क्यों पीछे रहें? लेकिन लक्ष्मण जी ने कहा कि, मेरा पूरा ध्यान भैय्या-भाभी की सेवा में लगा रहेगा।
उन्हें डर था कि उर्मिला की सुरक्षा की चिंता करना एक और बोझ बन जाएगा। उर्मिला ने अनिच्छा से उनका अनुरोध मान लिया और यहीं से शुरुआत होती है उनके शांतिपूर्वक बलिदान की। उन्हें लक्ष्मण की तरह रोमांच, सम्मान या युद्ध में गौरव प्राप्त नहीं हुआ। वह बस पीछे रह गईं।

नींद की देवी ने दिया आशीर्वाद
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, वनवास की पहली रात लक्ष्मण जी जागते रहे, जबकि मां सीता और प्रभु श्रीराम सो रहे थे। तभी नींद की देवी मां उनके समक्ष प्रकट हुईं। लक्ष्मण जी ने उनसे प्रार्थना की कि उन्हें 14 सालों तक जागते रहने की अनुमति दी जाए ताकि वे राम और सीता की रक्षा कर सकें।
लेकिन एक समस्या थी कि नींद की स्वाभाविक जरूरत यूं ही खत्म नहीं हो सकती थी। लक्ष्मण जिस नींद को त्याग करने की बात कर रहे थे, उसे किसी को संभालना था। इसलिए लक्ष्मण ने निद्रा से उर्मिला के पास जाने को कहा। इसके बाद जो हुआ उसने उर्मिला को घर में इंतजार करने वाली महिला से लक्ष्मण के यज्ञ का एक अभिन्न अंग बना दिया।
लोक परंपराओं के मुताबिक लक्ष्मण जी के बदले उर्मिला 14 सालों तक सोईं, जबकि उनके पति जागते रहे।
युद्ध क्षेत्र में उर्मिला की अहम भूमिका
रावण के साथ युद्ध में एक अप्रत्याशित मोड़ आता है, जब मेघनाद जिसे इंद्रजीत के नाम से भी जाना जाता था, लंका का अत्यंत शक्तिशाली योद्धा था। इंद्रजीत को युद्ध में केवल वही व्यक्ति हरा सकता था, जो 14 सालों तक जागृत रहा हो।
इस शर्त ने लक्ष्मण के असाधारण अनुशासन को एक नया मोड़ दिया। वे सिर्फ भक्ति के कारण ही नहीं जगे थे, बल्कि उनकी सालों की सतर्कता ही मेघनाद का सामना करने का एक कारण बनी। हालांकि इस उपलब्धि के पीछे असल में कोई था तो वो थी उर्मिला।
यह भी पढ़ें- राम सेतु बनाने के लिए नल और नील ही क्यों थे सक्षम? वाल्मीकि रामायण में छिपा है रहस्य
यह भी पढ़ें- रामायण से जुड़ा है कर्नाटक के मुरुदेश्वर मंदिर का इतिहास, जहां मौजूद है महादेव की 123 फीट ऊंची प्रतिमा
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
