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    रामायण से जुड़ा है कर्नाटक के मुरुदेश्वर मंदिर का इतिहास, जहां मौजूद है महादेव की 123 फीट ऊंची प्रतिमा

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 01:45 PM (IST)

    कर्नाटक का मुरुदेश्वर मंदिर अपनी 123 फीट ऊंची शिव प्रतिमा और रामायण से जुड़े रहस्य के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर कंदुका पहाड़ी पर अरब सागर के तट पर स्थ ...और पढ़ें

    कैसे स्थापित हुआ मुरुदेश्वर मंदिर?

    कैसे स्थापित हुआ मुरुदेश्वर मंदिर?

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। देशभर में भगवान शिव को समर्पित कई मंदिर हैं, जो किसी रहस्य या फिर अन्य कारण से अधिक प्रसिद्ध हैं। इन्हीं मंदिरों में कर्नाटक का मुरुदेश्वर मंदिर भी शामिल है। यह मंदिर अद्भुत शिव मंदिरों में से एक है। यह शिव मंदिर कंदुका पहाड़ी पर स्थित है। यहां का नजारा आने वाले हर शिव भक्त को मंत्रमुग्ध कर देता है।

    मंदिर का संबंध रामायण काल से माना जाता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं मुरुदेश्वर मंदिर का रहस्य और खासियत के बारे में।

    अधिक ऊंची है शिव प्रतिमा

    यह मंदिर कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के भटकल तालुका में कंदुका पहाड़ी पर अरब सागर के तट पर स्थित है। इस मंदिर की सबसे बड़ी पहचान और खासियत यह है कि यहां खुले आसमान के नीचे 123 फीट ऊंची भगवान शिव प्रतिमा है। इस महादेव की प्रतिमा पर सूर्य की पहली किरण पड़ती है, तो उस दौरान भगवान शिव की मूर्ति अद्भुत रूप से चमकती है।

    मंदिर का रामायण से है गहरा संबंध

    पौराणिक कथा के अनुसार, जब लंकापति रावण ने भगवान श्रीराम को प्रसन्न करने के लिए अधिक तपस्या की थी, जिससे राम जी प्रसन्न हुए और उसे आत्मलिंग प्रदान किया। राम जी ने कहा कि लंका पहुँचने से पहले इसे बीच में जमीन पर नहीं रखना है। आत्मलिंग को जमीन पर रखने से वही पर हमेशा के लिए स्थापित हो जाएगा। तो ऐसे में देवताओं को एक बात का भय था कि यदि रावण आत्मलिंग को लंका ले गया, तो वह अजेय हो जाएगा और आतंक मचाएगा। इसी वजह से भगवान गणेश ने ब्रह्मचारी बालक का रूप धारण किया।

    यात्रा के दौरान भगवन गणेश ने रावण से आत्मलिंग को जमीन पर रखवा दिया, जिससे आत्मलिंग स्थायी रूप से स्थापित हो गया। इसी वजह से रावण को क्रोध आया। ऐसे में रावण ने आत्मलिंग को नष्ट करने की कोशिश की, जिससे लिंग के टुकड़े हुए और कर्नाटक के अलग-अलग जगहों पर बिखर गए।

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    ऐसा माना जाता है कि आत्मलिंग के आवरण का एक हिस्सा जिस जगह पर गिरा था। उसी स्थान पर मुरुदेश्वर मंदिर का निर्माण हुआ। इसी वजह से मुरुदेश्वर मंदिर का संबंध भगवान शिव से है। इसलिए शिव भक्तों के लिए यह एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल बन गया। समुद्र के किनारे स्थित मुरुदेश्वर मंदिर अधिक दिव्य है। इस मंदिर में शिव प्रतिमा के नीचे संग्रहालय बनाया गया है। मुरुदेश्वर मंदिर के बाहर महादेव की प्रतिमा विश्व की दूसरी सबसे ऊँची शिव मूर्ति है।

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    Source- Murudeshwara Temple 

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।