Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    वैशाख अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए जरूर करें तर्पण, नोट करें सही विधि और महत्व

    Updated: Mon, 13 Apr 2026 07:32 PM (IST)

    वैशाख अमावस्या (Vaishakh Amavasya 2026) के दिन तर्पण और दान करने से पितरों को मोक्ष मिलता है। ...और पढ़ें

    Vaishakh Amavasya 2026: वैशाख अमावस्या से जुड़ी बातें। (Ai Generated Image)

    Vaishakh Amavasya 2026: वैशाख अमावस्या से जुड़ी बातें। (Ai Generated Image)

    HighLights

    1. वैशाख अमावस्या का बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है

    2. इस दिन तर्पण करने से पितरों की कृपा मिलती है

    3. वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल को मनाई जाएगी

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म वैशाख अमावस्या का बड़ा महत्व है। यह पितरों को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया तर्पण और दान सीधे पूर्वजों तक पहुंचता है, जिससे उन्हें मोक्ष मिलता है और परिवार में सुख-शांति का वास होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल को मनाई जाएगी। यह तिथि पितृ दोष दूर करने के लिए बहुत फलदायी मानी जा रही है, तो आइए इस तिथि (Vaishakh Amavasya 2026 Rules) से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं -

    tarpan-vidhi(2)-1775827191528

    वैशाख अमावस्या पर ऐसे करें पितरों का तर्पण? (Vaishakh Amavasya 2026 Tarpan Vidhi )

    • तर्पण हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए, क्योंकि यह दिशा पितरों की मानी जाती है।
    • तर्पण के जल में काले तिल, कुशा, अक्षत और सफेद फूल जरूर मिलाएं।
    • कुशा को अनामिका उंगली में अंगूठी की तरह पहनें।
    • जनेऊ धारण करने वाले लोग तर्पण के समय जनेऊ को दाएं कंधे पर रखें।
    • तर्पण करने वाले व्यक्ति को सात्विक रहना चाहिए।
    • तर्पण कभी भी सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद नहीं करना चाहिए।
    • दोपहर का समय तर्पण के लिए सबसे अच्छा होता है।
    • तर्पण किसी जानकार पुरोहित की मौजूदगी में ही कराना चाहिए।
    • इसके बाद दान-पुण्य जरूर करें।

    वैशाख अमावस्या पर ध्यान दें ये बातें (Vaishakh Amavasya 2026 Donts)

    • इस दिन घर के मुख्य द्वार पर अंधेरा न रखें, शाम को दीपक जरूर जलाएं।
    • इस तिथि पर मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन परिवार के किसी भी सदस्य को नहीं करना चाहिए।
    • अमावस्या की रात को किसी भी सुनसान जगह या श्मशान की ओर नहीं जाना चाहिए।

    पूजा मंत्र

    • देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
    • नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नमः।।
    • ॐ श्री सर्व पितृ देवताभ्यो नमो नमः।।
    • ॐ पितृ गणाय विद्महे जगत धारणी धीमहि तन्नो पितृ प्रचोदयात।।

    यह भी पढ़ें- पितरों की कृपा के लिए वैशाख अमावस्या पर करें इन मंत्रों का जप, करें ये काम, दूर होंगे सभी कष्ट

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।