वैशाख मास में अपनाएं पूजा के ये 5 नियम, जो दरिद्रता को जड़ से करेंगे खत्म
वैशाख माह को माधव मास भी कहते है। यह महीना प्रभु श्रीहरि की कृपा प्राप्ति के लिए बहुत ही उत्तम माना गया है। ...और पढ़ें

वैशाख मास के पूजा नियम (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
वैशाख माह में देना चाहिए सूर्य को अर्घ्य दें
विष्णु जी को लगाएं पंजीरी और पंचामृत का भोग
जलदान, पितृ तर्पण और पीपल पूजा से मिटते हैं पाप
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैशाख का महीना शुरू हो चुका है, जो 1 मई 2026 तक चलने वाला है। आध्यात्मिक उन्नति और आत्म-शुद्धि के लिए वैशाख माह को बहुत ही उत्तम माना जाता है। साथ ही वैशाख माह में पूजा से संबंधित कुछ नियम भी बताए गए हैं, जिनका ध्यान रखने से आपको पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। चलिए जानते हैं इस नियमों के बारे में।
पूजा में जरूर करें ये काम
- वैखास माह में रोजाना सुबह स्नान-ध्यान के बाद तांबे के लोटे में रोली, चीनी, और चावल मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- वैशाख माह में श्री हरि विष्णु की पूजा में उन्हें पंजीरी या पंचामृत का भोग जरूर लगाएं और उसमें तुलसी का पत्ता जरूर डालें। तुलसी के बिना प्रभु श्री हरि का भोग अधूरा माना जाता है।
- पूजा में “ओम् नमो भगवते वासुदेवाय नमः” और 'ॐ माधवाय नमः' मंत्र का जप करें।
- वैशाख माह में आप तुलसी के ऊपर एक छोटा घड़ा (गलंतिका) बांध सकते हैं, जिसमें से बूंद-बूंद पानी पौधे पर गिरता रहे। यह गर्मी में तुलसी की रक्षा करने का काम करता है और बहुत शुभ माना जाता है।
- रोजाना सुबह-शाम तुलसी की पूजा करें और उसके पास गाय के घी का दीपक जलाएं। इससे सकारात्मकता बनी रहती है।
पुण्यकारी माने गए हैं ये काम
- वैशाख मास में सूर्योदय से पहले स्नान करने और तीर्थ में स्नान से साधक के साभी कष्ट दूर होते हैं।
- आप चाहें, तो रोजाना घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं।
- वैशाख में जलदान सर्वोपरि माना गया है। ऐसे में आप इस महीने में राहगीरों के लिए प्याऊ लगवा सकते हैं।
- इस महीने में पितरों के निमित्त तर्पण करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। इससे जातक पर पूर्वजों का आशीर्वाद बना रहता है।
जरूर करें ये उपाय
प्रभु श्रीहरि की कृपा प्राप्ति के लिए आप वैशाख माह में कुछ विशेष उपाय भी कर सकते हैं। माना गया है कि वैशाख माह में सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद पीपल की पूजा करने और परिक्रमा करने से पाप नष्ट होते हैं। साथ ही आप पानी में गंगाजल, कच्चा दूध और तिल मिलाकर पीपल के पेड़ पर अर्पित कर सकते हैं। ऐसा करने से साधक को भगवान विष्णु की कृपा मिलती है और पितृ भी तृप्त होते हैं, जिससे सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
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