वट सावित्री पर भूलकर भी नहीं करें 5 गलतियां, वरना व्रत रह सकता है अधूरा!
वट सावित्री व्रत के दिन सुहागिन महिलाओं को किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, जिससे कि उनका व्रत अधूरा न रह जाए। ...और पढ़ें

वट सावित्री पूजा के दौरान इन नियमों का रखें ध्यान! (AI-Generated Image)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वट सावित्री का व्रत ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। हिंदू धर्म में आस्था रखने वाली महिलाएं इस दिन पति की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। वट सावित्री जैसे कि नाम से पता ही चल रहा है, इस दिन महिलाएं वट यानी बरगद और मां सावित्री की विधिवत रूप से पूजा-पाठ करती हैं।
मान्यताओं के मुताबिक, इस व्रत को करने से सदैव दांपत्य जीवन सुखमय रहता है। लेकिन वट सावित्री व्रत के दौरान कुछ कामों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए, वरना व्रत निष्फल होने के साथ अधूरा रह सकता है।
वट सावित्री के दिन किन चीजों का रखें खास ध्यान?
नकारात्मक विचार मन में न लाए
जो भी महिलाएं वट सावित्री का व्रत रखती हैं, तो उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि इस दिन किसी भी तरह के नकारात्मक विचार मन में ना आए। इसके अलावा किसी के प्रति गुस्सा, लालच या जलन की भावना भी न रखें। साफ मन से इस व्रत का पालन करें।
बाल और नाखून को काटने से बचें
वट सावित्री व्रत के दौरान बाल और नाखूनों को काटने की मनाही होती है। ऐसा करने से व्रत टूट सकता है। कोशिश करके व्रत से एक-दो दिन पहले ही इस तरह के कार्य करें।
सफेद, काले और नीले रंग की साड़ी पहनने से बचें
वट सावित्री का दिन सुहाग का प्रतीक है, ऐसे में इस खास मौके पर सफेद, काले या नीले रंग की साड़ी पहनने से बचें। इस दिन लाल या पीले रंग की साड़ी पहनें क्योंकि ये सुहागिन महिलाओं के रंग होते हैं। काले या सफेद रंग के वस्त्र नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने का काम करते हैं।

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पति के साथ बहस से बचें
माना जाता है कि, वट सावित्री व्रत के दिन किसी भी शादीशुदा महिला को अपने पति से लड़ाई-झगड़ा या विवाद नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से आपको व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होगा।
दिन के समय सोने से बचें
इसके अलावा जो भी व्रत महिलाएं अपने पति के लिए रखती हैं, अब वो चाहे करवा चौथ हो या वट सावित्री का उन्हें दिन के समय सोना नहीं चाहिए। धार्मिक दृष्टि से ऐसा करना अशुभ माना जाता है। दिन के समय भगवान का नाम या भजन-कीर्तन करना अच्छा विकल्प है।
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कथा के बीच में उठना गलत
इसके साथ ही सबसे जरूरी नियम यह है कि, वट सावित्री व्रत कथा के दौरान महिलाओं को कथा के बीच में नहीं उठना चाहिए, अन्यथा व्रत का पूरा फल नहीं मिलता है।
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