वट सावित्री व्रत 2026: वैवाहिक सुख के लिए पति-पत्नी इस तरह करें पूजा बरगद की पूजा
वैदिक पंचांग के अनुसार, वट सावित्री व्रत 16 मई 2026 को मनाया जाएगा, जो अटूट प्रेम और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक है। ...और पढ़ें
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वैवाहिक सुख के लिए पति-पत्नी ऐसे करें बरगद की पूजा
HighLights
16 मई 2026 को है वट सावित्री व्रत
पति-पत्नी मिलकर करें बरगद के पेड़ की पूजा
सावित्री-सत्यवान कथा सुनने से पूर्ण होता है व्रत
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत को विशेष महत्व दिया जाता है। यह केवल एक व्रत नहीं है, बल्कि अटूट प्रेम और दृढ़ इच्छाशक्ति का भी प्रतीक है। इस बार शनिवार को पड़ने के कारण इस व्रत का महत्व और भी बढ़ गया है। ऐसे में इस दिन पर पति-पत्नी को मिलकर पूजा करनी चाहिए, जिससे वैवाहिक जीवन खुशहाल बना रहता है।
पति-पत्नी मिलकर करें ये काम
वट सावित्री व्रत के दिन पति-पत्नी को मिलकर बरगद के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद मिलकर अपनी श्रद्धा के अनुसार वट वृक्ष की 11 या फिर 108 बार परिक्रमा करें और घी का दीपक जलाएं। इसके साथ ही वृक्ष की पूजा में सूती वस्त्र, 5 तरह के ऋतु फल, अक्षत, जनेऊ, चंदन, पान-सुपारी आदि अर्पित करें। माता सावित्री को शृंगार का सामान जैसे सिंदूर, कुमकुम, मेहंदी, चूड़ियां और बिंदी आदि चढ़ाएं। परिक्रमा के समय इस मंत्र का जप करें -
यानि कानि च पापानि जन्मांतर कृतानि च। तानि सर्वानि वीनश्यन्ति प्रदक्षिण पदे पदे।।
करें इन मंत्रों का जप
वट सावित्री व्रत की पूजा में सुख-समृद्धि की कामना के साथ पति-पत्नी मिलकर इस मंत्र का जप कर सकते हैं -
अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते।
पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तुते।।
यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले।
तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मा सदा।।
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(Picture Credit- AI Generated)
इन कार्यों के बिना अधूरा है व्रत
1. बरगद का 'दिव्य प्रसाद' ग्रहण करें
पूजा के बाद, बरगद के फल या कोपल (नई कोमल पत्तियां) को प्रसाद के रूप में जरूर ग्रहण करें।आध्यात्मिक रूप से इसे सावित्री के तप के अंश के रूप में देखा जाता है, जो सौभाग्य का संचार करता है।
2. वट वृक्ष की छाया में कथा सुनें
वट सावित्री का व्रत के दिन बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर सावित्री-सत्यवान की पौराणिक कथा पढ़ना या सुनना जरूरी है। मान्यता है कि इसी वृक्ष के नीचे यमराज ने सावित्री के समर्पण को देखते हुए उसके पति के प्राण वापस लौटाए थे। इसलिए इस स्थान पर कथा सुनने से ईश्वर का आशीर्वाद मिलता है।
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3. मिलेगी शनिवार की विशेष कृपा
चूंकि 2026 में यह व्रत शनिवार के दिन पड़ रहा है। ऐसे में इस दिन शनिदेव की पूजा करने से न केवल वैवाहिक बाधाएं दूर होंगी, बल्कि शनि दोष से भी राहत मिलेगी।
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