वट सावित्री की पूजा में बरगद को चढ़ा दें बस ये 4 चीजें, मिलेगा व्रत का पूरा फल
वट सावित्री व्रत सुहागिनों के लिए महत्वपूर्ण है, जो पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख के लिए ज्येष्ठ अमावस्या को मनाया जाता है। ...और पढ़ें
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अखंड सौभाग्य के लिए अर्पित करें ये चीजें (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
पति की लंबी आयु के लिए किया जाता है वट सावित्री व्रत
इस दिन की जाती है वट वृक्ष और माता सावित्री की पूजा
शृंगार अर्पित करने से मिलता है अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है। ज्येष्ठ माह की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पर्व पति की लंबी आयु, बेहतर स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति का प्रतीक है। इस बार यह पावन व्रत शनिववार, 16 मई को रखा जाएगा। चलिए जानते हैं कि इस दिन पूजा में आप किन चीजों को अर्पित करके लाभ पा सकते हैं।
क्यों खास है यह व्रत?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता सावित्री ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और पतिव्रत धर्म के बल पर यमराज को उनके पति सत्यवान के प्राण लौटाने पर मजबूर कर दिया था। माना जाता है कि यमदेव ने बरगद (वट) के पेड़ के नीचे ही सत्यवान को पुनर्जीवन दिया था। इसीलिए इस दिन पर विशेष तौर से वट वृक्ष की पूजा को साक्षात ईश्वर की आराधना माना जाता है।

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जरूर अर्पित करें ये चीजें
वट सावित्री व्रत के दिन वट वृक्ष की पूजा के दौरान सूती वस्त्र, लाल फूल, सिंदूर, कच्चा सूत, अक्षत (अटूट चावल), जनेऊ, चंदन और पान-सुपारी अर्पित करने चाहिए। इसके बाद पेड़ के पास घी का दीपक जलाएं और अपनी श्रद्धा के अनुसार, पेड़ के चारों ओर 7 या 108 बार परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत या मौली (लाल/पीला धागा) लपेटें। ऐसा करने से वैवाहिक संबंध मजबूत होते हैं।
माता सावित्री को अर्पित करें शृंगार
व्रत के दौरान केवल पेड़ की ही नहीं, बल्कि माता सावित्री की भी विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। माता को सिंदूर, कुमकुम, मेहंदी, चूड़ियां और बिंदी जैसी शृंगार की सामग्री जरूर चढ़ाएं। मान्यता है कि माता सावित्री को सुहाग का सामान चढ़ाने से व्रती महिला को 'अखंड सौभाग्य' का आशीर्वाद मिलता है।
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अर्पित करें ये भोग
वट सावित्री व्रत में वट वृक्ष के साथ-साथ सावित्री-सत्यवान और यमराज की भी पूजा की जाती है। इस दिन भीगे हुए चने (चने की दाल) का विशेष महत्व है, इसे सावित्री और सत्यवान को अर्पित करें। पूजा में 5 प्रकार के ऋतु फल (जैसे आम, जामुन, केला, तरबूज, खरबूज, नारियल पानी) भी जरूर शामिल करें। इसके साथ ही आप पूजा में गुड़ से बनी मिठाई या गुड़ से बनी मीठी पूरी भी अर्पित कर सकते हैं।
करना न भूलें ये काम
पूजा के बाद बरगद के फल या कोपल (नई पत्ती) को प्रसाद के रूप में ग्रहण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके साथ ही वट वृक्ष के नीचे बैठकर सावित्री-सत्यवान की कथा जरूर पढ़ें या सुनें, तभी आपका व्रत पूर्ण माना जाता है। चूंकि इस बार यह व्रत शनिवार के दिन पड़ रहा है, जो कि शनिदेव का दिन है, इसलिए इस दिन शनिदेव की पूजा से भी आपको अद्भुत लाभ देखने को मिल सकते हैं।
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