वट सावित्री व्रत 2026: अखंड सौभाग्य के साथ मिलेगी शनिदेव की कृपा, नोट करें पूजा विधि और मुहूर्त
वट सावित्री व्रत वैवाहिक जीवन की परेशानियों को दूर करने और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद पाने के लिए खास है। ...और पढ़ें
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वट सावित्री व्रत की पूजा विधि और महत्व
HighLights
पति की लंबी उम्र के लिए किया जाता है वट सावित्री व्रत
वट सावित्री व्रत पर बन रहा है शनि जयंती का दुर्लभ संयोग
इस दिन पर शनिदेव की कृपा के लिए कर सकते हैं विशेष उपाय
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। ज्येष्ठ माह की अमावस्या पर रखा जाने वाला यह व्रत पति की लंबी उम्र का वरदान देता है। इस बार शनि जयंती का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है, जिससे यह दिन शनिदेव की विशेष कृपा पाने के लिए भी खास माना जा रहा है। चलिए पढ़ते हैं वट सावित्री व्रत की पूजा विधि और इसका महत्व।
वट सावित्री व्रत की पूजा विधि
- सुहागन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे व नए कपड़े विशेषकर लाल रंग की साड़ी पहनें और सोलह शृंगार करें।
- पूजा की थाली में रोली, चंदन, धूप, दीप, भीगे चने और कलावा जरूर रखें।
- बरगद के पेड़ के पास जाकर उसे प्रणाम करें और उसकी जड़ में शुद्ध जल अर्पित करें।
- वट वृक्ष के साथ सावित्री और सत्यवान की पूजा करें और उन्हें हल्दी, रोली (सिंदूर), चंदन, फूल और अक्षत (चावल) समर्पित करें।
- कच्चे सूत (धागे) को वट वृक्ष के चारों ओर लपेटते हुए परिक्रमा करें। आप अपनी श्रद्धा के अनुसार 7, 12, 51, या 108 बार परिक्रमा कर सकती हैं।
- पूजा में भीगे चने, गुड़ और मौसमी फल चढ़ाएं।
- साथ ही बांस का पंखा चढ़ाएं और वृक्ष को हवा करें।
- हाथ में फूल और चने लेकर वट सावित्री व्रत की कथा सुनें।
- अंत में अपने पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करें और घर के बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लें।
वट वृक्ष पूजन मंत्र -
अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते।
पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते॥
परिक्रमा करने का मंत्र -
वट सावित्री व्रत की पूजा में वृक्ष पर सूत लपेटते समय इस मंत्र का जप करना चाहिए -
यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले।
तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मां सदा॥
वट सावित्री व्रत का महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावित्री एक ऐसी पतिव्रता स्त्री थीं, जिन्होंने अपनी बुद्धिमानी और दृढ़ निश्चय से मृत्यु के देवता भगवान यम को भी विवश कर दिया था। सावित्री ने यमराज से न केवल अपने पति सत्यवान के प्राण वापस मांगे, बल्कि अपने सास-ससुर की आंखों की रोशनी और खोया हुआ राज्य भी प्राप्त किया।
जरूर करें ये विशेष उपाय
वट सावित्री व्रत के दिन शनि जयंती भी है, इसलिए वट वृक्ष की पूजा के बाद किसी शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जरूर जलाएं और काले तिल का दान करें। इससे आपके पति के करियर में आने वाली बाधाएं दूर हो सकती है।
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