इस दिन रखा जाएगा विभुवन संकष्टी का व्रत, अभी नोट करें डेट और शुभ मुहूर्त
विभुवन संकष्टी चतुर्थी 3 जून 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन गणेश जी की पूजा से विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि आती है, साथ ही व्रत के नियम और पूजा सामग् ...और पढ़ें

विभुवन संकष्टी चतुर्थी के दिन क्या रहेगा शुभ मुहूर्त? (AI Generated Image)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गणपति बप्पा की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत भी किया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, विभुवन संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश जी की पूजा करने से सभी विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि किस दिन मनाई जाएगी विभुवन संकष्टी चतुर्थी और शुभ मुहूर्त के बारे में।
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विभुवन सकष्टी चतुर्थी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Vibhuvana Sankashti Chaturthi 2026 Date and Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ (अधिक) माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 03 जून को रात 09 बजकर 21 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 04 जून को रात 11 बजकर 30 मिनट पर होगा। ऐसे में 03 जून को विभुवन संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी।
संकष्टी के दिन चन्द्रोदय - 03 जून को रात 10 बजकर 04 मिनट से 10 बजकर 43 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- कोई नहीं
अमृत काल- रात 07 बजकर 37 मिनट से 09 बजकर 24 मिनट तक
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 02 मिनट से 04 बजकर 43 मिनट तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 38 मिनट से 03 बजकर 34 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 07 बजकर 14 मिनट से 07 बजकर 34 मिनट तक
विभुवन संकष्टी चतुर्थी पूजा सामग्री लिस्ट
- फूल
- जनेऊ
- लौंग
- दीपक
- पीला कपड़
- चौकी
- दूध'
- जल
- धूप
- देसी घी
- 11 या 21 तिल के लड्डू
- मोदक
- गंगाजल
- फल
- कलश
- सुपारी
- गणेश जी की प्रतिमा
विभुवन संकष्टी के दिन ध्यान रखें ये बातें
- गणेश जी की पूजा के दौरान उन्हें जल, रोली, चंदन, लाल फूल अर्पित करें।
- व्रत कथा का पाठ करें।
- मंत्रों का जप करें।
- अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करें।
- प्रिय मोदक या तिल के लड्डुओं का भोग अवश्य लगाएं।
- व्रत के दौरान फल, दूध, साबूदाना या कुट्टू के आटे से बनी चीजों का सेवन करें।
- संकष्टी चतुर्थी का व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता, जब तक रात में चंद्रमा के दर्शन न कर लिए जाएं।
- व्रत के दौरान मन शांत रखना चाहिए। किसी पर क्रोध न करें, विवाद से बचें
- ब्रह्मचर्य के नियम का पालन करना चाहिए।
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