करियर में बाधा और हर काम में देरी? अभी जान लें कुंडली में शनि के कमजोर होने के बड़े संकेत
ज्योतिष के अनुसार, कुंडली में शनि के कमजोर होने से कर्ज, बीमारी और करियर में बाधाएं आती हैं। शनि को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ और पीपल क ...और पढ़ें
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ये हैं कमजोर शनि के संकेत (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शनि देव की पूजा-अर्चना करने का खास महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शनि देव की साधना करने से जीवन में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं और बिगड़े काम पूरे होते हैं। शनि देव को कर्मफल दाता और न्याय का देवता माना गया है। शनि देव व्यक्ति को कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं।
ऐसा माना जाता है कि व्यक्ति की कुंडली में शनि देव की स्थिति अशुभ होती है, तो जीवन में कई तरह की समस्यों का सामना करना पड़ता है। इससे व्यक्ति को जीवन में कुछ खास संकेत भी मिलते हैं, जिनके द्वारा पता लगाया जाता है कि कुंडली में शनि की स्थिति शुभ या फिर अशुभ, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि कुंडली में शनि की स्थिति अशुभ क्यों होती है और इससे जुड़े संकेत के बारे में।

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कुंडली में शनि कमजोर होने के संकेत
- अगर आप जीवन में लंबे समय से कर्ज की समस्या का सामना कर रहे हैं और बना-बनाया काम बिगड़ रहा है, तो समझ लें कुंडली में शनि कमजोर हो सकता है।
- कुंडली में शनि कमजोर होने पर जीवन में कई बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।
- इसके अलावा करियर में सफलता प्राप्त न होने की वजह कुंडली में शनि की स्थिति अशुभ हो सकती है।
- अगर आपके मने में बुरे विचार आ रहे हैं या फिर सुस्ती महसूस हो रही है, तो इसे कुंडली में शनि कमजोर होने का संकेत माना जाता है।
कैसे करें शनि को प्रसन्न?
- कुंडली में शनि को मजबूत करने के लिए मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से कुंडली में शनि मजबूत होता है।
- इसके अलावा शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाएं। पेड़ की 3, 4 या 7 बार परिक्रमा लगाएं। इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं।
- शनि ग्रह को मजबूत करने के लिए काले तिल, काली उड़द की दाल और काले कंबल का दान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन चीजों का दान करने से जीवन में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।
जब गोचर के दौरान शनि सूर्य के नजदीक आता है, तो सूर्य के तेज से शनि अस्त हो जाते हैं। इसकी वजह से शनि का प्रभाव कम हो जाता है, जिसके कारण शनि अशुभ परिणाम देने लगते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हर ग्रह की एक उच्च और एक नीच राशि होती है। शनि मेष राशि में नीच के माने जाते हैं। अगर शनि मेष राशि में विराजमान हों, तो वे अपनी शक्ति खो देते हैं, जिसकी वजह से अशुभ फल देते हैं।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।