सावन मास विशेष: क्या है 'शिव चर्चा'? पढ़ें भगवान शिव को गुरु मानने की इस अनूठी परंपरा के अद्भुत लाभ
सावन मास में शिव चर्चा का आयोजन भगवान शिव को गुरु मानकर उनकी महिमा और गुणों की चर्चा करने को ...और पढ़ें

सावन में शिव चर्चा कराने के फायदे

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में श्रावण मास का महीना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस महीने भगवान शिव के भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए तमाम तरह के धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन करते हैं। जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और भजन कीर्तन कराने के साथ कई लोग शिव चर्चा का भी आयोजन करते हैं।
जब दो या दो से अधिक लोग भगवान शिव को गुरु के रूप में याद करते हैं, तो उसे आम भाषा में शिव चर्चा कहा जाता है। इसमें भगवान शिव का नाम, भजन-कीर्तन, ध्यान और साधना शामिल हैं। जब हम शिव की चर्चा दो या दो से ज्यादा मनुष्यों के बीच करते हैं, तो हमारा शिव से गुरु-शिष्य का नाता बन जाता है।
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी से जानिए शिव चर्चा का अर्थ
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषियों के अनुसार, शिव चर्चा का अर्थ है "भगवान शिव को अपना गुरु मानकर आपस में उनके स्वरूप, भक्ति, और महिमा की चर्चा करना।" इसका मुख्य मूल वाक्य है- "शिव मेरे गुरु हैं, मैं उनका शिष्य हूं।" इसमें किसी विशेष आडंबर, कर्मकांड या व्यय की आवश्यकता नहीं होती।
भक्त एक स्थान पर एकत्र होकर सिर्फ भगवान शिव के गुणों, कथाओं और अनुभूतियों का आदान-प्रदान करते हैं तथा भजन-कीर्तन करते हैं। इस भावधारा की शुरुआत मुख्य रूप से साहब श्री हरिंद्रानंद जी द्वारा की गई थी।

शिव चर्चा कराने के फायदे
सावन के महीने में शिव चर्चा आयोजित करने से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:
मानसिक शांति
भगवान शिव के नाम और गुणों के चिंतन से मन की चंचलता समाप्त होती है और वातावरण में शुभता आती है।
सच्चा ज्ञान
शिव को आदिगुरु माना गया है। जब आप उन्हें गुरु मानकर चर्चा करते हैं, तो जीवन में सही मार्गदर्शन और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
क्लेश का नाश
सावन के महीने में शिव चर्चा आयोजित करने से पूरे घर और समाज में भक्तिमय माहौल बनता है, जिससे क्लेश दूर होते हैं।
पापों से मुक्ति
शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव की कथा और चर्चा सुनने मात्र से जाने-अनजाने में हुए कष्ट और पाप नष्ट हो जाते हैं।
किन राज्यों में है अधिक लोकप्रिय?
शिव चर्चा का प्रचलन मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगालके क्षेत्रों में बहुत अधिक लोकप्रिय है। विशेष रूप से सावन के महीने में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाएं व भक्त समूह बनाकर शिव चर्चा का आयोजन करते हैं।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
