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    मुनि, देव, मानव या राक्षसी...आप रोज कौन-सा स्नान कर रहे हैं? नहाने से पहले जरूर जान लें ये नियम

    Updated: Tue, 05 May 2026 03:15 PM (IST)

    यह लेख हिंदू धर्म में स्नान के महत्व और प्रकारों पर प्रकाश डालता है, जिसमें मुनि, देव, मानव और राक्षसी स्नान शामिल हैं। यह स्नान के सही समय, तरीके और ...और पढ़ें

    जानें हिंदू धर्म में नहाने के सही नियम और प्रकार (Picture Credit- AI Generated)

    जानें हिंदू धर्म में नहाने के सही नियम और प्रकार (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. स्नान के चार प्रकार हैं- मुनि, देव, मानव, राक्षसी

    2. नहाने का सही समय और दिशा महत्वपूर्ण है

    3. बिना कपड़ों के नहाना पितृ दोष का कारण बन सकता है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। चाहे बात पर्सनल हाइजीन की हो या पूजा-पाठ की, सबसे पहला ख्याल नहाने का ही आता है। दिनभर की थकान मिटानी हो या फिर सुबह की बेहतरीन शुरुआत करनी हो, नहाना हमारी रूटीन का एक अहम हिस्सा है। 

    साइंस में शरीर की सफाई के लिए नहाना जरूरी है, तो वहीं हिंदू धर्म और शास्त्रों में मन और आत्मा की शुद्धि के लिए इसे अहम माना गया है। ऐसा माना जाता है बिना नहाए की गई पूजा या किसी भी शुभ काम का फल इंसान को नहीं मिलता। ऐसे में शास्त्रों के अनुसार नहाने के क्या नियम है, इसके बारे में जानने बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं नहाने का सही समय, सही तरीका और इससे जुड़े नियम क्या हैं। 

    कितने तरह का होता है स्नान?

    शास्त्रों में समय के अनुसार चार तरह के स्नान का वर्णन मिलता है, जो कुछ इस प्रकार हैं- 

    • मुनि स्नान (सुबह 4 से 5 बजे): इस दौरान किए गए स्नान को सबसे उत्तम और सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान का ध्यान करते हुए ब्रह्म मुहूर्त में नहाने से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता आती है।
    • देव स्नान (सुबह 5 से 6 बजे): सुबह के इस समय किया गया स्नान  देव स्नान कहलाता है। पवित्र नदियों और तीर्थों का स्मरण करते हुए नहाना बेहद फलदायी होता है।
    • मानव स्नान (सुबह 6 से 8 बजे): आमतौर पर इस समय गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग नहाते हैं। इस समय तक नहाना सामान्य और अच्छा माना गया है।
    • राक्षसी स्नान (सुबह 8 बजे के बाद या कुछ खाने के बाद): सूर्योदय के काफी देर बाद या कुछ भी खा-पीकर नहाने को शास्त्रों में राक्षसी या दानव स्नान कहा गया है। ऐसा करने से इंसान को हमेशा बचना चाहिए।

    क्या है नहाने का सही तरीका?

    नहाने के दौरान सिर्फ सही समय का ही नहीं, बल्कि सही तरीके और नियमों का भी ध्यान रखना चाहिए। नीचे दिए गए कुछ नियमों का नहाते समय जरूर पालन करना चाहिए।

    • नहाने के पानी में हमेशा थोड़ा-सा गंगाजल, गुलाब जल, हल्दी या चंदन जैसी कोई शुभ चीज जरूर मिलानी चाहिए।
    • नहाते समय कोशिश करें कि आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ हो।
    • आमतौर पर लोग नहाते समय सबसे पहले सिर पर पानी डालते हैं, लेकिन साइंस और धर्म दोनों में भी इसे गलत तरीका माना गया है। नहाते समय पहले  पैरों पर पानी डालें और फिर शरीर के बाकी हिस्सों पर।
    • शास्त्रों में पूरी तरह निर्वस्त्र यानी बिना कपड़ों के नहाने की भी मनाही है। इसे  जल के देवता वरुण का अपमान माना जाता है और मान्यता है कि इससे पितृ दोष भी लगता है।
    • अगर आप गंगा या किसी अन्य पवित्र नदी में नहा रहे हैं, तो पानी में कुल्ला न तो करें और न ही वहां मैले कपड़े धोएं।
    • नहाते समय 'गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति, नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् संनिधिं कुरु' का जप करना फायदेमंद माना जाता है।

    इन स्थितियों में जरूर नहाएं? 

    कोई भी धार्मिक काम मांगलिक कार्य, मंदिर जाने या रसोई में खाना पकाने से पहले नहाना अनिवार्य माना गया है। इसके अलावा निम्न हालातों के बाद भी नहाना जरूरी है- 

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।