अंतिम संस्कार में किन लकड़ियों का इस्तेमाल होता है? गरुड़ पुराण में छिपे रहस्य से आप भी होंगे अनजान
हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार के लिए तुलसी, बरगद और बबूल जैसी कुछ विशेष लकड़ियों का उपयोग महत्वपूर्ण माना गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार, इन लकड़ियों के ...और पढ़ें

अंतिम संस्कार में लकड़ियों का महत्व और गरुड़ पुराण के रहस्य (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
तुलसी की लकड़ी आत्मा की मुक्ति में सहायक मानी जाती है।
बरगद की लकड़ी दाह संस्कार को अच्छी तरह पूर्ण करने में मदद करती है।
बबूल की लकड़ी मृतक की आत्मा को मोक्ष दिलाने का साधन है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार का विशेष महत्व है और इसके कुछ अलग-अलग नियम बनाए गए हैं जिनका पालन जरूरी माना जाता है।
जिस तरह से इस प्रक्रिया में कई तरह की चीजों का इस्तेमाल होता है वैसे ही इसके लिए सही तरह की लकड़ियों का इतेमाल करने की भी सलाह दी जाती है।
आमतौर पर कुछ विशेष प्रकार की लकड़ियों से ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया की जाती है और इससे मृतक की आत्मा को शांति भी मिलती है।
गरुड़ पुराण में इस बात का वर्णन है कि जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसकी आत्मा को मोक्ष दिलाने के लिए तुलसी की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है। इससे मृतक की आत्मा को मुक्ति मिल सकती है। आइए आपको बताते हैं अंतिम संस्कार में किन-लकड़ियों का इस्तेमाल शुभ होता है।
तुलसी की लकड़ी
गरुड़ पुराण के अनुसार तुलसी की लकड़ी चिता में डाल दी गई है तो कई अपराध करने वाला व्यक्ति आसानी से मुक्ति प्राप्त कर लेता है।
इस संस्कार के दौरान आध्यात्मिक शुद्धि के लिए चिता में तुलसी की छोटी टहनियां या लकड़ी रखी जाती हैं और इनसे व्यक्ति को मोक्ष तक जाने में मदद मिलती हो। तुसली को माता लक्ष्मी का स्वरुप भी माना जाता है इस वजह से ये और ज्यादा पवित्र हो जाती है और इसे शुद्धिकरण का एक तरीका माना जाता है।
बरगद की लकड़ी का इस्तेमाल
मृत्योपरांत बड़ी और मजबूत लकड़ियां जो लगातार गर्मी देती हैं और दाह-संस्कार को अच्छी तरह से पूरा करने में मदद करती हैं उनमें से एक है बरगद की लकड़ी।
आमतौर पर बरगद की लकड़ी से दाह संस्कार करने को शुभ माना जाता है और इसे मुक्ति का एक तरीका कहा जाता है। बरगद के वृक्ष की भी पूजा की जाती है और इसकी लकड़ियों को अंतिम समय में आत्मा की मुक्ति का एक तरीका माना जाता है। अंतिम संस्कार के लिए बरगद की लकड़ी को भी बहुत शुभ माना जाता है क्योंकि एक लकड़ी कम धुंए के साथ भी काफी देर तक जलती है।
बांस की लकड़ी
मुख्य रूप से बांस की लकड़ी को अंतिम संस्कार के लिए विशेष माना जाता है और इसी लकड़ी से अंतिम संस्कार करने से आत्मा को मुक्ति मिलती है।
यह लकड़ी दाम में भी किफायती होती है इसलिए इसका इस्तेमाल कोई भी आसानी से कर सकता है और यह लकड़ी अच्छी तरह से जलती है। गरुड़ पुराण में इस लकड़ी को ही मृतक की मुक्ति का साधन माना जाता है।
खबरें और भी
इन सभी लकड़ियों का इस्तेमाल अंतिम संस्कार के समय किया जाता है और इन्हें मोक्ष का धाम माना जाता है। इसके अलावा भी कुछ लकड़ियां हैं जिन्हें मृत शरीर के दाह संस्कार के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जिनमें से बबूल, नीम, पीपल प्रमुख हैं।
यह भी पढ़ें- अंतिम संस्कार के बाद श्मशान घाट से लौटकर स्नान करना क्यों है जरूरी? जानिए धार्मिक और वैज्ञानिक कारण
यह भी पढ़ें- मृत्यु के बाद घर में मृत्युभोज का आयोजन जरूरी क्यों होता है? गरुड़ पुराण में छिपा है रहस्य
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।