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    आम भूतों से कितने अलग हैं 'ब्रह्मराक्षस'? गरुड़ पुराण में छिपा है इनकी उत्पत्ति का सच

    Updated: Wed, 17 Jun 2026 05:00 PM (IST)

    ब्रह्मराक्षस शक्तिशाली शैतानी आत्माएं हैं जो ज्ञान का दुरुपयोग करने वाले विद्वान ब्राह्मणों की होती हैं। ये अपने पापकर्मों के कारण श्रापित होकर जंगलों ...और पढ़ें

    ब्रह्मराक्षस कौन थे? (AI-Generated Image)

    ब्रह्मराक्षस कौन थे? (AI-Generated Image)

    HighLights

    1. ब्रह्मराक्षस ज्ञान का दुरुपयोग करने वाले विद्वान ब्राह्मणों की आत्माएं होते हैं।

    2. अपने पापकर्मों के कारण श्रापित होकर जंगलों में भटकते रहते हैं।

    3. इनका स्वरूप लंबा, पतला, दुबला और राख से ढका हुआ होता है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हममें से अधिकतर लोगों ने कभी न कभी ब्रह्मराक्षस का नाम जरूर सुना होगा। लेकिन इनके बारे में सटीक जानकारी बहुत कम लोगों को ही पता है। दरअसल ब्रह्मराक्षस बेहद शक्तिशाली होते हैं, जिनमें कई तरह की खास शैतानी ताकतें होती हैं।

    आम भूतों या सामान्य राक्षस से अलग ब्रह्मराक्षस काफी पढ़े-लिखे ब्राह्मण, पुजारी और विद्वान या गुरु की आत्मा होती है, जिसने में अपने जीवनकाल में ज्ञान का इस्तेमाल गलत काम में किया। मरने के बाद उन गंभीर अपराधों के कारण ब्रह्मराक्षस बन गया।

    ब्रह्मराक्षस की उत्पत्ति

    ब्रह्मराक्षस की उत्पत्ति संस्कृति के दो शब्दों से मिलकर बना है, ब्रह्म (जिसका मतलब ब्राह्मण या वेदों से जुड़ा व्यक्ति) जबकि राक्षस (दानव या दुष्ट आत्मा) इस तरह से ब्रह्मराक्षस एक ऐसी राक्षसी आत्मा को कहा जाता है, जो कभी एक विद्वान ब्राह्मण थी, लेकिन अपने पापकर्म और बुरे आचरण की वजह से श्रापित आत्मा बन गई।

    ब्रह्मराक्षस

    ब्रह्मराक्षस (AI-Generated Image)

    ब्रह्मराक्षस बनने का कारण?

    हिंदू कॉस्मोलॉजी के अनुसार, अगर कोई ब्राह्मण जो पवित्रता, निस्वार्थता और ज्ञान फैलाव के कर्मों से जुड़ा हो, और वो अपने कार्यों को ईमानदारी से न करें और उनका इस्तेमाल मोह, वासना या लालसा के उद्देश्य से करें तो मरने के बाद कर्मों का फल भुगतना पड़ता है।

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    ब्रह्मराक्षस बनने का असल कारण, उसके घमंड का पाप है। जिसका मतलब है कि, एख विद्वान जिसने वेदों और शास्त्रों के अपने विशाल ज्ञान का प्रयोग दूसरों को नीचा दिखाने, पैसा जमा करने या झूठे भगवान होने का दावा करने के लिए किया हो।

    ज्ञान का दुरुपयोग करना भी अपराध

    गरुड़ पुराण जैसे ग्रंथों में साफ-साफ लिखा है कि, जो ब्राह्माण पवित्र ग्रंथों के ज्ञान को तोड़-मरोड़कर या गलत तरीके से पेश करता है या अपने ज्ञान का दुरुपयोग करता है, वो मरने के बाद ब्रह्मराक्षस बनता है।

    इसके अलावा जो हत्या, छात्र या गुरु के साथ धोखा या फिर मंदिर के धन का गलत इस्तेमाल करता है, उसे भी ब्रह्मराक्षस जैसे पापों का सामना करना पड़ता है।

    हिंदू पुराणों में बताया गया है कि, श्रापित आत्माएं ब्रह्मराक्षस के रूप में अकेले जंगलों में भटकती रहती हैं, जब तक कि कोई नेक इंसान उन्हें स्वतंत्र करने के लिए खास रस्म नहीं निभाए।

    पुराणों में श्रापित आत्माओं के बारे में बताया गया है जो ब्रह्मराक्षस के रूप में अकेले जंगलों में भटकती रहती हैं, जब तक कि कोई नेक इंसान उन्हें आज़ाद करने के लिए कोई खास रस्म नहीं करता।

    11वीं सदी की मशहूर भारतीय कहानियों का संग्रह कथासरित्सागर में घने जंगलों में यात्रियों के ब्रह्मराक्षस से मिलने की कई कहानियां प्रचलित हैं। इन कहानियों में ब्रह्मराक्षस को अक्सर दिमागी पहेलियों या धार्मिक बहसों से यात्री की परीक्षा लेता है। अगर यात्री इसमें असफल हो जाए तो उसकी मौत हो जाती है।

    ब्रह्मराक्षस  (1)

    ब्रह्मराक्षस का स्वरूप (AI-Generated Image)

    ब्रह्मराक्षस का स्वरूप कैसा

    ब्रह्मराक्षस को आमतौर पर काफी लंबा, पतला और दुबला बताया जाता है, जिनकी त्वचा पीली, राख से ढकी या काफी काली होती है। वे आमतौर पर ब्राह्मणों की ही तरह पारंपरिक कपड़ों के फटे हुए हिस्से, धड़ पर एक गंदा धागा और सिर पर बिखरे बालों का गुच्छा बताया जाता है। उन्हें अक्सर बड़े पेड़ों की डालियों पर उल्टा लटका हुआ दिखाया जाता है, और वे नीचे जमीन पर अनजान शिकार की तलाश में रहते हैं।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।