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    क्या है स्वास्तिक और उसके साथ बनी 2-2 खड़ी रेखाओं का धार्मिक अर्थ?

    Updated: Thu, 09 Jul 2026 08:30 AM (IST)

    स्वास्तिक और उसकी 4 रेखाओं को लेकर हिंदू धर्म में कई सारी बातें प्रचलित हैं। चलिए हम आपको उन सभी के बारे में बताते हैं। ...और पढ़ें

    घर में स्‍वास्तिक होना होता है लाभकारी। (Picture Credit- AI Generated)

    घर में स्‍वास्तिक होना होता है लाभकारी। (Picture Credit- AI Generated)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में कुछ पवित्र चिन्‍हों के बारे में बताया गया है। स्‍वास्तिक उन्‍हीं चिन्‍हों में से एक है। यह एक संस्‍कृत शब्‍द है, जिसका अर्थ शुभ-मंगल होता है। हिंदू धर्म में लोग अपने घर के मंदिर और मुख्‍य द्वार पर स्‍वास्तिक का चिन्‍ह बनाते हैं, ताकि सकारात्‍मक ऊर्जा का घर में वास हो।

    स्वास्तिक के साथ दोनाते तरफ 2-2 रेखाएं भी बनाई जाती हैं, जिसका क्‍या अर्थ होता है, इस बारे में कम लोगों को ही जानकारी है। तो चलिए हम आपको इन रेखाओं के महत्‍व के बारे में बाताते हैं।

    चार पुरुषार्थ

    ये रेखाएं जीवन के चार मूल लक्ष्यों की ओर ईशारा करती हैं। जो है धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की ओर इशारा करते हैं। इसमें बताया गया है कि मनुष्‍य को जीवन में हमेशा धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। धन कमाने के लिए कर्म करना चाहिए। अपनी इच्‍छाओं की पूर्ती करनी चाहिए और अंत में सब कुछ यहीं छोड़कर मुक्ति के मार्ग पर बढ़ जाना चाहिए।

    चार वेद

    हिंदू धर्म में चार वेदों के बारे में भी बताया गया है। इनमें ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद आते हैं। इन वेदों में धार्मिक अनुष्‍ठानों और मंत्र जाप के बारे में बताया गया है। वहीं इसमें सेहत को दुरुस्‍त रखने वाली बातें भी हैं और संगती के माध्‍यम से जीवन को मधुर बनाने का ज्ञान भी है।

    चार दिशाएं और युग

    धार्मिक शास्‍त्रों में चार दिशाओं पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण और चार युगों सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलियुग की भी बात की गई है। यानी वास्‍तु के हिसाब से भी स्वास्तिक बहुत लाभकारी होता है।

    स्वास्तिक का केंद्र

    स्वास्तिक के मध्य भाग को भगवान विष्णु की नाभि बताया गया है। कहते हैं यदि रोज स्वास्तिक के मध्‍य भाग के दर्शन कर लिए जाएं, तो दिन सफल हो जाता है। वहीं कुछ धार्मिक ग्रंथों में इस बात का भी उल्‍लेख मिलता है कि स्वास्तिक श्री गणेश का स्‍वरूप हैं और 2-2 रेखाएं उनके बेटे शुभ लाभ और पत्नियां ऋद्धि सिद्धि हैं। इसलिए किसी भी पूजा में सबसे पहले स्वास्तिक बनाकर उसकी पूजा की जाती है।

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    ऐसा भी कहा जाता है कि

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    और उसकी इन चार रेखाओं के बिना अधूरा है और यदि किसी स्‍थान पर ऐसा स्वास्तिक बना होता है, वहां नकारात्‍मक ऊर्जा का प्रवाह रहता है।

    अत: स्वास्तिक एक बहुत ही पवित्र चिन्‍ह है और यह अपनी रेखाओं के बिना अधूरा है।

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।