क्यों चढ़ाया जाता है शिव जी को भांग और धतूरा? समुद्र मंथन से जुड़ी यह बेहद रोचक पौराणिक कथा
सावन में शिवलिंग पर भांग और धतूरा चढ़ाने का विशेष महत्व है, जिससे महादेव प्रसन्न होते हैं और भक्तों के ...और पढ़ें
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शिव जी को क्यों प्रिय है भांग और धतूरा(Picture Credits- AI Image)
HighLights
सावन में शिव को भांग-धतूरा चढ़ाना शुभ माना जाता है।
यह प्रथा समुद्र मंथन में विषपान से जुड़ी है।
महादेव प्रसन्न होकर भक्तों के कष्ट दूर करते हैं।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन के महीने को महादेव की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन में शिव की साधना और व्रत करने से भक्त के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही सभी संकट दूर होते हैं। शिव की पूजा के दौरान शिवलिंग पर जल और बेलपत्र के साथ-साथ भांग और धतूरा अर्पित किया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि शिवलिंग पर इन चीजों को अर्पित करने से शिव जी अधिक प्रसन्न होते हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही महादेव की कृपा से सभी मुरादें पूरी होती हैं। क्या आप जानते हैं कि शिवलिंग पर भांग और धतूरा क्यों चढ़ाया जाता है? अगर नहीं पता, तो आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं शिवलिंग पर भांग और धतूरा अर्पित करने की वजह के बारे में।
शिव जी पर भांग और धतूरा क्यों चढ़ाया जाता है?
पौराणिक कथा के अनुसार, अमृत प्राप्ति के लिए जब असुरों और देवताओं के बीच समुद्र मंथन हुआ, तो उसमें से भयंकर विष निकला था, जिसका नाम हलाहल विष था। इस भयंकर विष को भगवान शिव ने पी लिया था, जिसकी वजह से उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए।
ऐसे में भवगान शिव की जलन को शांत करने के लिए देवताओं ने उनपर कई तरह की जड़ी-बूटियां और जल अर्पित किया, जिनमें भांग और धतूरा भी शामिल थे। तभी से शिवलिंग पर भांग और धतूरा चढ़ाने से की शुरुआत हुई। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सावन के महीने में असुरों और देवताओं के बीच समुद्र मंथन हुआ था। इसलिए सावन में भगवान शिव पर भांग और धतूरा चढ़ाने का अधिक महत्व है।
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भांग और धतूरा से शिव होते हैं प्रसन्न
धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा के दौरान शिव जी पर भांग और धतूरा अर्पित करने से महादेव भक्त के जीवन में आने वाले सभी संकट को दूर करते हैं। साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही करियर में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। ऐसा माना जाता है कि शिव जी पर भांग और धतूरा अर्पित न करने से पूजा अधूरी मानी जाती है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए छप्पन भोग या महंगे आभूषणों की आवश्यकता नहीं होती। वे धतूरे, भांग और बेलपत्र से ही प्रसन्न हो जाते हैं।
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