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    सावन में कब-कब रखा जाएगा मंगला गौरी व्रत? अभी नोट कर लें ये जरूरी तारीखें

    Updated: Sun, 12 Jul 2026 09:30 AM (IST)

    सावन में मंगला गौरी व्रत का विशेष महत्व है, जो पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत 4, 11, 18 और 25 अगस्त को ...और पढ़ें

    कैसे करें मंगला गौरी व्रत? (Picture Credits- AI Image)

    कैसे करें मंगला गौरी व्रत? (Picture Credits- AI Image)  

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन के सावन के महीने को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार सावन की शुरुआत 30 जुलाई से होगी और समापन 28 अगस्त को होगा। इस माह में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का अधिक महत्व है। साथ ही मंगला गौरी व्रत किया जाता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन होता है। साथ ही महादेव के संग मां पार्वती की कृपा प्राप्त होती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि सावन में कब-कब किया जाएगा मंगला गौरी व्रत।

    कब-कब है मंगला गौरी व्रत 2026? (Mangla Gauri Vrat 2026 Dates)

    पहला मंगला गौरी व्रत- 4 अगस्त 2026
    दूसरा मंगला गौरी व्रत- 11 अगस्त 2026
    तीसरा मंगला गौरी व्रत- 18 अगस्त 2026
    चौथा मंगला गौरी व्रत- 25 अगस्त 2026

    कैसे करें मंगला गौरी व्रत?

    • मंगला गौरी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद साफ कपड़े धारण करें। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें।
    • हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
    • इसके बाद मंदिर की सफाई करने के बाद लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
    • अब चौकी पर मां पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा को विराजमान करें।
    • रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें।
    • देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें।
    • माता पार्वती को 16 सोलह शृंगार का की सभी वस्तुएं अर्पित करें।
    • व्रत कथा का पाठ करें।
    • पार्वती चालीसा का पाठ करें और मंत्रों का जप करें।
    • आरती के बाद सभी को प्रसाद बांटें।
    mangla gauri vrat 2026 (1)

    (Picture Credits- AI Image)  

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    मंगला गौरी व्रत के नियम

    • मंगला गौरी व्रत के दौरान किसी से भी वाद-विवाद भूलकर भी नहीं करना चाहिए। मन में किसी के बारे में गलत न सोचें। मन को शांत रखकर भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करें।
    • इसके अलावा इस दिन काले रंग के कपड़े न धारण करें।
    • तामसिक चीजों का सेवन न करें।

    उद्यापन का नियम- जो महिलाएं मंगला गौरी व्रत को करती हैं, तो उन्हें पांच साल पूरे होने के बाद सावन के अंतिम मंगलवार के दिन विधिपूर्वक मंगला गौरी व्रत उद्यापन करना चाहिए। व्रत का उद्यापन न करने से व्रत सफल नहीं होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, उद्यापन करने से व्रत पूर्ण माना जाता है और मां पार्वती की कृपा से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।