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    भगवान कार्तिकेय ने क्यों किया था तारकासुर का वध? पढ़ें शिव पुराण की ये कथा

    Updated: Sun, 05 Jul 2026 05:30 PM (IST)

    शिव पुराण के अनुसार, भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर का वध इसलिए किया क्योंकि उसे ब्रह्मा से वरदान था कि उसकी मृत्यु केवल शिव पुत्र के हाथों होगी। तारकासु ...और पढ़ें

    कैसे हुआ भगवान कार्तिकेय का जन्म? (Picture Credit: AI Generated)

    कैसे हुआ भगवान कार्तिकेय का जन्म? (Picture Credit: AI Generated)  

    HighLights

    1. तारकासुर को ब्रह्मा से मिला था शिव पुत्र से मृत्यु का वरदान।

    2. देवताओं को तारकासुर के अत्याचार से मुक्ति दिलाने हेतु कार्तिकेय का जन्म।

    3. भगवान कार्तिकेय ने शक्ति अस्त्र से तारकासुर का वध किया।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान कार्तिकेय भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं। उन्हें स्कंद देव के नाम से भी जाना जाता है। शिव पुराण में भगवान कार्तिकेय के जन्म से जुड़ी कथा अधिक प्रेरणादायक है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर का वध किया था।

    तारकासुर ने तपस्या कर ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया था, जिससे उसको एक वरदान प्राप्त हुआ। तारकासुर को वरदान मिला था कि उसकी मृत्यु केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही हो सकती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर का वध क्यों किया था। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए इस लेख में आपको विस्तार से बताते हैं कि तारकासुर के वध से जुड़ी कथा के बारे में।

    Lord Kartikeya

    (Picture Credit: AI Generated)  

    कैसे हुआ तारकासुर का अंत?

    पौराणिक कथा के अनुसार, तारकासुर नाम के असुर ने कठोर तपस्या के द्वारा ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया। ब्रह्मा जी ने तारकासुर को एक वरदान दिया। वरदान यह था कि तारकासुर की मृत्यु सिर्फ भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही होगी।

    ब्रह्मा जी की शरण में पहुचें देवता

    माता सती के आत्मदाह करने के बाद भगवान शिव वैरागी हो चुके थे। वहीं, तारकासुर ने वरदान पाने के बाद स्वर्ग पर अधिकार कर लिया और देवताओं को परेशान करने लगा। देवता तारकासुर के अत्याचार से पीड़ित होकर ब्रह्मा जी की शरण में पहुचें। उन्होंने ब्रह्मा जी से तारकासुर के अत्याचार से मुक्ति पाने का उपाय पूछा, लेकिन उनसे कोई मदद नहीं मिली।

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    ब्रह्मा जी ने देवताओं से कहा कि तारकासुर का अंत भगवान शिव के पुत्र के हाथों से ही होगा, लेकिन समस्या एक आ गई थी कि भगवान शिव ने माता सती के आत्मदाह के बाद सांसारिक मोह-माया का त्याग कर दिया था। अब भगवान शिव को गृहस्थ कैसे बनाया जाए।

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    कार्तिकेय को सेना का प्रधान सेनापति किया नियुक्त

    भगवान शिव से देवताओं ने विवाह करने की प्रार्थना की। इसके बाद महादेव के विवाह करवाने की योजना बनाई। मां पार्वती की तपस्या से विवाह संपन्न हुआ। इसके बाद उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई, जिसका नाम कार्तिकेय रखा।
    एक बार महादेव ने कार्तिकेय को कैलाश पर्वत पर बुलाया। देवताओं ने कार्तिकेय को सेना का प्रधान सेनापति नियुक्त किया। इसके बाद तारकासुर और कार्तिकेय के बीच युद्ध हुआ। कार्तिकेय जी ने शक्ति शक्ति की मदद से तारकासुर का वध किया। उसके आतंक से देवताओं को मुक्त कराया। इस कथा का वर्णन शिव महापुराण में रुद्र संहिता के तृतीय खंड और पार्वती खंड में मिलता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।