पीपल को क्यों कहते हैं कलयुग का कल्पवृक्ष? जानिए इसकी महिमा और धार्मिक महत्व
पीपल के वृक्ष को हिंदू धर्म में देव वृक्ष माना गया है। भगवान कृष्ण ने स्वयं को वृक्षों में पीपल कहा है। आइए यहां इसकी महिमा को समझते हैं। ...और पढ़ें

Peepal Tree Significance: कलयुग का कल्पवृक्ष है पीपल। Ai Generated Image
HighLights
पीपल में साक्षात त्रिदेवों का वास होता है
इसे कलयुग का कल्पवृक्ष माना जाता है
इसकी पूजा का बहुत ज्यादा महत्व है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में प्रकृति को ईश्वर का स्वरूप माना गया है। इनमें पीपल का स्थान सबसे ऊपर है। ऋग्वेद से लेकर श्रीमद्भगवद्गीता तक, पीपल की महिमा का गुणगान मिलता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसे कलयुग का कल्पवृक्ष क्यों कहा जाता है? पौराणिक कथाओं के अनुसार, कल्पवृक्ष स्वर्ग का वह वृक्ष है, जिसके नीचे बैठने मात्र से हर इच्छा पूरी हो जाती है। कलयुग में पीपल को वही दर्जा मिला है, क्योंकि यह न केवल धार्मिक सुख बल्कि शारीरिक कष्टों से भी मुक्ति दिलाता है। ऐसे में आइए यहां इसकी महिमा को जानते हैं।
देवताओं का साक्षात निवास

Ai Generated Image
श्लोक
मूलतः ब्रह्म रूपाय, मध्यतः विष्णु रूपिणे, अग्रतः शिव रूपाय, अश्वत्थाय नमो नमः।।
शास्त्रों में पीपल को 'अश्वत्थ' कहा गया है। यानी इसके जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में शिव का वास है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में खुद कहा है कि "अश्वत्थः सर्ववृक्षाणाम्" यानी वृक्षों में मैं पीपल हूं। साक्षात ईश्वर का स्वरूप होने के कारण ही इसे कलयुग में मनोकामना पूर्ति का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है।
शनि और पितृ दोष से मुक्ति का मार्ग
लोग अक्सर शनि की महादशा और पितृ दोष से परेशान रहते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पीपल की सेवा करने से इन दोनों दोषों का प्रभाव कम होता है। कहा जाता है कि शनि देव ने पीपल के वृक्ष को वरदान दिया था कि जो व्यक्ति शनिवार को इस वृक्ष की पूजा करेगा और दीपक जलाएगा, उसे शनि की पीड़ा नहीं सहनी पड़ेगी। साथ ही, अमावस्या के दिन पीपल में जल अर्पित करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
वैज्ञानिक तर्क
धार्मिक महत्व के साथ-साथ इसका वैज्ञानिक आधार भी इसे कल्पवृक्ष बनाता है। पीपल एकमात्र ऐसा वृक्ष है, जो दिन-रात यानी 24 घंटे ऑक्सीजन छोड़ता है। इसकी विशाल छाया पर्यावरण के जहरीले तत्वों को नष्ट करती है। साथ ही आयुर्वेद में पीपल की छाल, पत्तों और फलों का उपयोग कई बड़ी बीमारियों के उपचार में किया जाता है।
खबरें और भी
कैसे करें पूजा?
अगर आप जीवन में आर्थिक तंगी या अन्य किसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो हर शनिवार को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करते हुए उसकी सात परिक्रमा करें। ऐसा माना जाता है कि इस सरल उपाय को करने से जीवन के बड़े से बड़े कष्टों से मुक्ति मिलती है।
यह भी पढ़ें: एक अधूरी प्रेम कहानी ने मोड़ा नर्मदा का रुख? जानिए क्यों सदियों से उल्टी दिशा में बह रही है यह पवित्र नदी
यह भी पढ़ें: प्राचीन परंपरा या मॉडर्न ट्रेंड? लड़कों के कान छिदवाने पर क्या कहते हैं हमारे पूर्वज और शास्त्र
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा अंधविश्वास के खिलाफ है।