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    मंदिर के शिखर पर क्यों फहराई जाती है ध्वजा? हर सनातनी को जरूर जानना चाहिए इसका रहस्य

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 08:02 AM (IST)

    हिंदू मंदिरों के शिखर पर ध्वजा क्यों लगाई जाती है? क्या यह सिर्फ एक सजावट है या इसका कोई गहरा अर्थ है? ...और पढ़ें

    मंदिरों के शिखर पर ध्वजा क्यों लगाते हैं? (AI-Generated Image)

    मंदिरों के शिखर पर ध्वजा क्यों लगाते हैं? (AI-Generated Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। जब भी हम किसी मंदिर दर्शन के लिए जाते हैं, तो हमारी नजर सबसे पहले मंदिर के शिखर पर लहराती ध्वजा (झंडे) पर पड़ती है। चाहे मंदिर छोटा हो या विशाल, उसके शीर्ष पर झंडा जरूर होता है। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि इसे इतनी ऊंचाई पर क्यों लगाया जाता है, जहां कोई इसे आसानी से छू न सके?

    इसका सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि गहरा आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी बताया जाता है। आइए, इसके पीछे के रहस्य को आसान भाषा में समझते हैं।

    दैवीय शक्ति की मौजूदगी का अहसास

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंदिर के ऊपर लहराती ध्वजा सबसे पहले यह बताती है कि वहां किस देवता का वास है। यह सिर्फ भगवान की पहचान नहीं, बल्कि उस स्थान की पवित्र ऊर्जा का भी प्रतीक है। झंडे का रंग और उस पर बने चिह्न मंदिर में विराजमान देवता के स्वभाव के अनुसार होते हैं। इसे देखकर भक्तों को ईश्वर के करीब होने और उनकी सुरक्षा का अहसास होता है।

    बुराइयों पर जीत का प्रतीक

    दुनिया भर की कई संस्कृतियों में झंडा जीत का निशान माना जाता है। मंदिर के शिखर पर लगा झंडा भी कोई सजावटी वस्तु नहीं है। यह इस बात का प्रतीक है कि इस पवित्र स्थान पर अज्ञानता, अहंकार और बुरे विचारों पर आध्यात्मिक ज्ञान की जीत हुई है। यह हमें याद दिलाता है कि ईश्वर की शरण में आने से हर तरह के भटकाव पर विजय पाई जा सकती है।

    त्याग और समर्पण का संदेश

    सनातन धर्म के मंदिरों में आमतौर पर नारंगी (भगवा) रंग की ध्वजा यानी झंडे का इस्तेमाल होता है। यह रंग त्याग, वैराग्य और सादगी को दर्शाता है। यह रंग हमें सिखाता है कि हम अपने अहंकार को छोड़कर खुद को भगवान के चरणों में समर्पित कर दें, ठीक वैसे ही जैसे संतों ने अपना जीवन निस्वार्थ भाव से जिया है।

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    धरती और ब्रह्मांड का कनेक्शन

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ध्वज स्तंभ (जिस डंडे पर झंडा लगता है) धरती और ब्रह्मांड के बीच एक पुल का काम करता है। इसे एक ऐसी ब्रह्मांडीय धुरी (Axis Mundi) माना जाता है जो अलग-अलग लोकों को जोड़ती है। जब झंडा हवा में लहराता है, तो माना जाता है कि वह स्वर्ग से धरती पर रहने वाले भक्तों तक आशीर्वाद ला रहा है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।