घर में क्यों नहीं रखा जाता काशी का गंगाजल? पढ़ें इसके पीछे का गहरा आध्यात्मिक रहस्य
हिंदू धर्म में गंगाजल को अमृत माना गया है, लेकिन शिव की नगरी काशी का गंगाजल घर लाना वर्जित क्यों है? 'स्कंद पुराण' के अनुसार जानें इसके पीछे का असली क ...और पढ़ें

काशी से क्यों नहीं लाते गंगाजल? (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गंगाजल को अमृत के समान बेहद पवित्र माना गया है। हर हिंदू परिवार के घर और मंदिर में आपको गंगाजल से भरा एक पात्र जरूर मिल जाएगा। घर में कोई पूजा-पाठ हो, कोई शुभ संस्कार हो, तर्पण करना हो या फिर घर का शुद्धिकरण करना हो, गंगाजल के बिना हर धार्मिक काम अधूरा ही माना जाता है।
ज्यादातर लोग जब हरिद्वार, ऋषिकेश या गंगोत्री की यात्रा पर जाते हैं, तो वहां से बोतलों में भरकर गंगाजल अपने घर जरूर लाते हैं। वहां का जल जीवन, बेहतर स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। लेकिन, एक बहुत ही रोचक बात यह है कि जब बात शिव की नगरी काशी (वाराणसी) की आती है, तो लोग वहां से कभी गंगाजल अपने घर नहीं लाते हैं। आखिर ऐसा क्यों है?
मोक्ष और मुक्ति की नगरी है काशी
काशी को भगवान शिव की प्रिय नगरी और सीधे तौर पर मोक्ष का द्वार कहा गया है। हमारे प्राचीन ग्रंथ स्कंद पुराण (काशी खंड) में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख मिलता है- ‘काश्यां मरणं मुक्तिः’।
इस श्लोक का सीधा सा अर्थ यह है कि काशी की पवित्र भूमि पर जिसकी मृत्यु होती है, उसे हमेशा के लिए मोक्ष (मुक्ति) मिल जाता है। यह मान्यता है कि यहां मणिकर्णिका घाट पर शरीर जलता नहीं, बल्कि आत्मा हर सांसारिक बंधन से मुक्त होती है। मृत्यु के समय स्वयं भगवान शिव मृतक के कान में ‘तारक मंत्र’ फूंकते हैं, जो आत्मा की मुक्ति की असल चाबी है।
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घर क्यों नहीं लाते काशी का गंगाजल?
काशी से गंगाजल न लाने के पीछे कोई अंधविश्वास या गंगा जल के अशुद्ध होने की बात बिल्कुल नहीं है। यह नियम केवल दिवंगत आत्माओं के प्रति एक गहरे सम्मान का प्रतीक है। काशी के प्रमुख मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर दिन-रात चिताएं जलती रहती हैं। यहां हर दिन सैकड़ों मृतकों की अस्थियां और भस्म मां गंगा की पावन गोद में विसर्जित की जाती हैं। ऐसे में यहां बहने वाली गंगा केवल 'जीवनदायिनी' नहीं रह जातीं, बल्कि वे उन आत्माओं के लिए 'मोक्षदायिनी' बन जाती हैं।
आध्यात्मिक नजरिए से देखा जाए तो, अगर हम काशी से गंगाजल घर लाते हैं और अगर उसमें किसी मृत आत्मा की राख या भस्म का कोई भी सूक्ष्म अंश आ जाता है, तो अनजाने में ही हम उनकी मोक्ष यात्रा में रुकावट बन सकते हैं।
सिर्फ महादेव का आशीर्वाद लाएं
हरिद्वार और गंगोत्री का गंगाजल हमारे जीते-जीते काम आने वाली शुभता के लिए है। वहीं, काशी की गंगा मरणोत्तर जीवन यानी मृत्यु के बाद की शांति के लिए समर्पित हैं। इसलिए यह एक अलिखित नियम और विनम्र श्रद्धा है कि काशी से जल, राख या कोई अन्य भौतिक वस्तु नहीं लाई जाती। वहां से हम सिर्फ शिव का असीम आशीर्वाद और अपने मन की शांति लेकर लौटते हैं।
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