सावन में शादी-विवाह जैसे शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते हैं? क्या है धार्मिक मान्यता
सावन मास में विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते क्योंकि यह महीना भगवान शिव की तपस्या और भक्ति के ...और पढ़ें

सावन में क्यों वर्जित हैं शादी विवाह धार्मिक मान्यताएं और कारण (Picture Credit: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन का महीना पूरी तरह से भगवान शिव को समर्पित होता है और इस दौरान ज्योतिष के कुछ आसान उपाय करने से इच्छाओं की पूर्ति होती है।
इस दौरान जहां एक तरफ शिवलिंग पर जल चढ़ाना और शिव जी को उनकी पसंद की चीजें चढ़ाना शुभ माना जाता है। वहीं इस समय को लेकर कई मान्यताएं भी हैं।
वैसे तो यह महीना पूजा-पाठ के लिए मुख्य माना जाता है, लेकिन इस दौरान कुछ विशेष तरह के काम न करने की सलाह दी जाती है। सावन के महीने में विवाह, गृह प्रवेश या मुंडन जैसे मांगलिक कार्य न करने के बारे में बताया जाता है। इसके पीछे कई गहरे धार्मिक और पौराणिक कारण बताए जाते हैं। आइए जानें इस दौरान मुख्य रूप से शादी करने की मनाही क्यों होती है और इसके कारण क्या हैं?
सावन में पूजा -पाठ के लाभ
सावन की पूरी अवधि को किसी भी उत्सव से स्थान अपर साधना और पूजा-पाठ के लिए शुभ माना जाता है। इस दौरान पृथ्वी के संचालन का कार्य महादेव भोलेनाथ के ऊपर होता है और इस अवधि को उत्सव के स्थान पर साधना और ईश्वर भक्ति के लिए विशेष माना जाता है।
इस दौरान आप जितनी पूजा करते हैं उतने ही ज्यादा लाभ मिलते हैं। इस वजह से ही व्यक्ति को पूजा में मन लगाने की सलाह दी जाती है। यही नहीं इस दौरान शादी की मनाही भी होती है।
भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं
सावन के महीने में शादी-विवाह न करने के पीछे एक और प्रमुख कारण यह माना जाता है कि देवशयनी एकादशी के बाद से ही भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं।
विष्णु जी के इन चार महीनों की निद्रा की अवधि में किसी भी तरह के विवाह या उससे जुड़ी रस्में करने से मना किया जाता है क्यों क्योंकि इस दौरान विष्णु जी का आशीर्वाद नहीं मिलता है।
किसी भी शादी की पूर्णता तभी मानी जाती है जब माता लक्ष्मी समेत विष्णु जी का आशीर्वाद भी शादी में वर-वधु को मिले। इसके बाद शादियों की शुरुआत कार्तिक महीने में देव उठनी एकादशी के बाद से होती है।
शादी के लिए श्री हरि का आशीर्वाद जरूरी क्यों होता है।
आषाढ़ मास की देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। श्री हरि के आशीर्वाद की अनिवार्यता मानी जाती है।
सनातन परंपरा में किसी भी विवाह या मांगलिक कार्य को सफल और सुखद जीवन के लिए सृष्टि के पालनकर्ता श्री हरि विष्णु का आशीर्वाद अनिवार्य माना जाता है। इसी वजह से उनके शयन काल में शादी जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है।
तपस्या और भक्ति का समय
सावन के पूरे महीने में पृथ्वी का संचालन महादेव ही करते हैं इसी वजह से यह समय सांसारिक उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि तपस्या, साधना, आत्म शुद्धि और भक्ति का होता है। इस दौरान आप जितनी शिव भक्ति करते हैं उसके उतने ही ज्यादा लाभ दिखाई देते हैं।
लेखक: श्री चंद्रेश शर्मा, astropatri.com, फीडबैक के लिए लिखें: hello@astropatri.com
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।
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