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शिव जी के ठीक सामने ही क्यों विराजमान रहते हैं नंदी महाराज? पढ़ें पौराणिक कथा

Updated: Wed, 12 Aug 2026 09:51 AM (IST)

शिव मंदिर में दर्शन करते समय हम अक्सर नंदी के कान में अपनी मनोकामना बताते हैं। लेकिन क्या आप जानते ...और पढ़ें

आखिर शिवलिंग की तरफ क्यों होता है नंदी का मुख? (AI-Generated Image)

आखिर शिवलिंग की तरफ क्यों होता है नंदी का मुख? (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आपने अक्सर देखा होगा कि हर शिव मंदिर में शिवलिंग के ठीक सामने नंदी महाराज विराजमान होते हैं। हम जब भी मंदिर जाते हैं, तो अपनी मुरादें सीधे शिवजी को बताने की बजाय नंदी जी के कानों में कहते हैं। मान्यता है कि नंदी के जरिए ही हमारी मनोकामना सीधा महादेव तक पहुंचती है। लेकिन क्या आप इसके पीछे की कहानी जानते हैं?

ऋषि शिलाद की तपस्या और नंदी का जन्म

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, शिलाद नाम के एक ऋषि भगवान शिव के बहुत बड़े भक्त थे। वो अपन सारा समय शिव जी की आराधना में बिताते थे, लेकिन उनके जीवन में एक ही दुख था कि उनकी कोई संतान नहीं थी। एक दिन उनके पितरों ने उन्हें याद दिलाया कि बिना संतान के उनका वंश आगे नहीं बढ़ सकता। यह सुनकर ऋषि शिलाद ने संतान पाने के लिए शिवजी की घोर तपस्या शुरू कर दी।

ऋषि शिलाद की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए और उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दे दिया। कुछ समय बाद, जब ऋषि अपने खेत की जुताई कर रहे थे, तो उन्हें मिट्टी के भीतर से एक बेहद ही तेजवान और दिव्य बालक मिला। ऋषि ने इसे शिवजी का आशीर्वाद माना और उस बच्चे का नाम रखा- 'नंदी'।

अल्पायु का श्राप

नंदी बचपन से ही धार्मिक स्वभाव के थे। एक दिन ऋषि के आश्रम में दो साधु आए। उन्होंने नंदी को देखकर भविष्यवाणी की कि इस बालक की उम्र बहुत छोटी (अल्पायु) है। यह सुनकर पिता शिलाद बुरी तरह टूट गए और दुखी रहने लगे। लेकिन, नंदी ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने पिता को समझाते हुए कहा, "पिताजी, जब मुझे स्वयं महादेव ने भेजा है, तो मेरे जीवन का फैसला भी वही करेंगे।"

महादेव ने दिया अमरता का वरदान

नंदी की इस अटूट श्रद्धा और तपस्या को देखकर शिवजी को उनके सामने प्रकट होना ही पड़ा। महादेव ने मुस्कुराते हुए कहा, "नंदी, तुम तो मेरे ही अंश हो, भला तुम्हें मृत्यु से कैसा डर?" उसी वक्त शिवजी ने नंदी को अजर-अमर होने का वरदान दे दिया।

सिर्फ इतना ही नहीं, भगवान शिव ने नंदी को अपने गणों का प्रमुख (गणाध्यक्ष) बना दिया और उन्हें अपने अभिन्न अंग के रूप में स्वीकार किया।

आखिर शिवलिंग की तरफ क्यों होता है नंदी का मुख?

नंदी सिर्फ शिव जी की सवारी नहीं, बल्कि उनके सबसे बड़े भक्त भी माने जाते हैं। उनका मुख हमेशा शिवलिंग की ओर इसलिए होता है क्योंकि यह उनके संपूर्ण समर्पण और निष्ठा का प्रतीक है। नंदी हमें यह सिखाते हैं कि इंसान की दृष्टि और ध्यान हमेशा अपने ईष्ट देव पर केंद्रित होना चाहिए। अगर हमारा ध्यान सही जगह है, तो नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता है। शिव पुराण की 'शतरुद्र संहिता' (अध्याय 6 और 7) में नंदीकेश्वर अवतार का विस्तृत वर्णन है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।