आखिर क्यों भगवान शिव के गले का हार बने नागराज वासुकी? शिव पुराण में छिपा है समुद्र मंथन का ये अनसुना सच
भगवान शिव के गले में नागराज वासुकी के धारण होने का रहस्य समुद्र मंथन से जुड़ा है, जहां वासुकी को रस्सी के रूप में इस्तेमाल किया गया था। शिव जी ने प्रस ...और पढ़ें

भगवान शिव का नागराज वासुकी से क्या है संबंध? (Picture Credit: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैसे तो भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए सभी महीने महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन सावन का पवित्र महीना महादेव को प्रसन्न करने के लिए शुभ माना जाता है। इस माह में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने का अधिक महत्व है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिव जी की साधना करने से सभी सुख मिलते हैं और जीवन में आने वाले दुखों से छुटकारा मिलता है। महादेव के सिर पर चंद्रमा, जटाओं में गंगा, हाथ में त्रिशूल और डमरू, गले में नागराज वासुकी हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान शिव गले में क्यों नागराज वासुकी को धारण किए हुए हैं। इसका विस्तार से वर्णन शिव पुराण में किया गया है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं कि भगवान शिव का नागराज वासुकी से क्या संबंध है।

(Picture Credit: AI Generated)
भगवान शिव को क्यों प्रिय है नागराज वासुकी?
पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब सृष्टि की रक्षा और अमृत प्राप्ति के लिए देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, तो नागराज वासुकी को ही मंथन की रस्सी के रूप में इस्तेमाल किया गया। समुद्र मंथन के दौरान नागराज वासुकी पूरी तरह से लहू-लुहान हो गए थे। इससे भगवान शिव अधिक प्रसन्न हुए और उन्होंने नागराज वासुकी को अपने गले में धारण करने का वरदान दिया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तभी से महादेव के गले में नागराज वासुकी विराजमान हैं।
समुद्र मंथन के दौरान हलाहल नाम का विष निकला था। इस विष के प्रभाव से सृष्टि को बचाने के लिए महादेव ने हलाहल विष पी लिया। यह विष एक अत्यंत शक्तिशाली और विनाशकारी था। इस विष की वजह से भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया और जलने लगा। इस दौरान देवी-देवताओं ने महादेव का अभिषेक किया, जिससे हलाहल का प्रभाव खत्म हुआ।
खबरें और भी
महादेव के परम भक्त हैं नागराज वासुकी
धार्मिक मान्यता के अनुसार, वासुकी को नागलोक का राजा माना गया है। नागराज वासुकी भगवान शिव के परम भक्त हैं। नागराज वासुकी को भगवान शिव के गले का आभूषण के रूप में धारण करते हैं। ऐसा माना जाता है कि महादेव के संग नागराज वासुकी की पूजा-अर्चना करने से कालसर्प दोष की समस्या दूर होती है और महादेव की कृपा प्राप्त होती है। रोजाना नागराज वासुकी की साधना करने से सर्प भय से रक्षा होती है।
यह भी पढ़ें- सावन में कितनी बार 'ओम नम: शिवाय' मंत्र का जाप करने से खुलेगा भाग्य?
यह भी पढ़ें- क्या सावन में नाग-नागिन को नाचते देखना सच में सौभाग्य लाता है? जानिए क्या कहते हैं शास्त्र और विज्ञान!
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।