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रुद्राभिषेक में श्रृंगी से ही शिवलिंग पर जल क्यों चढ़ाया जाता है? इसके धार्मिक महत्व के बारे में नहीं जानते होंगे आप

Published: Thu, 30 Jul 2026 07:09 PM (IST)

रुद्राभिषेक में शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए श्रृंगी पात्र का विशेष महत्व है, जिसे गाय के सींग जैसा बनाया ...और पढ़ें

रुद्राभिषेक में श्रृंगी से जल चढ़ाने का धार्मिक महत्व (Picture Credit: AI Generated)

रुद्राभिषेक में श्रृंगी से जल चढ़ाने का धार्मिक महत्व (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. श्रृंगी रुद्राभिषेक में शिवलिंग पर जल चढ़ाने का विशेष पात्र है।

  2. यह अनुष्ठान को पूर्ण कर शिव को शीतलता प्रदान करता है।

  3. पौराणिक कथा के अनुसार नंदी ने शिव को श्रृंगी भेंट की थी।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा को विशेष रूप से फलदायी बताया गया है। मुख्य रूप से सावन का पूरा महीना शिव पूजन के लिए समर्पित होता है। इस दौरान लोग घर या मंदिर में रुद्राभिषेक का आयोजन करते हैं और शिव जी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

रुद्राभिषेक को भगवान शिव को प्रसन्न करने का एक सबसे आसान तरीका माना जाता है और इससे घर में भी सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इस विशेष अनुष्ठान में मंत्रों के उच्चारण के साथ शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी, शहद और अन्य पवित्र सामग्रियों से अभिषेक किया जाता है जिसे अत्यंत फलदायी माना जाता है।

रुद्राभिषेक में एक विशेष पात्र का इस्तेमाल किया जाता है जिसे श्रृंगी कहते हैं। यूं कहा जाए कि इसके बिना अनुष्ठान पूर्ण नहीं है। आइए आपको बताते हैं कि रुद्राभिषेक में श्रृंगी से जल चढ़ाना महत्वपूर्ण क्यों है।

क्या होता है श्रृंगी पात्र?

श्रृंगी पूजा में इस्तेमाल होने वाला एक विशेष प्रकार का पात्र होता है, जिसका आकार गाय या किसी अन्य पशु के सींग जैसा होता है। श्रृंगी आमतौर पर धातुओं का बना होता है जैसे चांदी, तांबे या पीतल से इसे बनाया जाता है।

पूरे रुद्राभिषेक के दौरान इसी श्रृंगी से शिवलिंग पर जल की धारा अर्पित की जाती है। शृंगी से होकर गुजरने वाली जलधारा भगवान शिव को शीतलता प्रदान करती है जिससे भक्त को उनका आशीर्वाद मिलता है।

शिवलिंग पर श्रृंगी से जल चढ़ाने का महत्व क्या है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रृंगी से शिवलिंग पर जल चढ़ाने से पूजा का प्रभाव और ज्यादा बढ़ जाता है। श्रृंगी से निकलने वाली जलधारा निरंतर होती है और ये सीधे शिवलिंग तक पहुंचती है।

इसी वजह से श्रृंगी से रुद्राभिषेक करने से इस अनुष्ठान को पूर्ण माना जाता है। पौराणिक कथाओं और शिवमहापुराण में बताया गया है कि यह पात्र भगवान शिव को उनके परम भक्त नंदी ने उपहार स्वरुप दिया था और तभी से शिव जी ने इसके अपने अभिषेक के लिए एक प्रिय पात्र के रूप में स्वीकार किया था। उसी समय से शिवलिंग के अभिषेक के लिए इस पवित्र पात्र का इस्तेमाल होने लगा।

श्रृंगी से किया गया रुद्राभिषेक शुभ क्यों माना जाता है?

पुराणों में बताया गया है कि भगवान शिव को जलधरा अत्यंत प्रिय है और श्रृंगी से निकलकर शिवलिंग तक पहुंचने वाली जलधारा बहुत शुद्ध मानी जाती है।

रुद्राभिषेक के समय इस जलधारा में किसी प्रकार की बाधा नहीं आती है, जिसकी वजह से यह जल लगातार शिवलिंग तक पहुंचता है और इसका सीधा प्रभाव शिव जी के मस्तक पर होता है। इसी वजह से श्रृंगी के माध्यम से शिवलिंग पर जल चढ़ाना भगवान शिव के प्रति श्रद्धा का भी प्रतीक होता है।

क्या बिना श्रृंगी के रुद्राभिषेक किया जा सकता है?

मान्यता है कि जब भी रुद्राभिषेक किया जाए उसमें श्रृंगी का इस्तेमाल ही किया जाए, लेकिन यदि किसी कारण से श्रृंगी न मिल पाए तो आप किसी अन्य पात्र जैसे तांबे के लोटे से भी जल चढ़ा सकते हैं। आपको जल चढ़ाते समय इस बात का ध्यान रखने की जरूरत है कि शिवलिंग पर जलधारा टूटनी नहीं चाहिए।

रुद्राभिषेक में श्रृंगी का प्रयोग करने से इस अनुष्ठान को पूर्ण माना जाता है और भगवान शिव का आशीर्वाद भी मिलता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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