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    सिख विवाह परंपरा: आनंद कारज में 7 के बजाय लिए जाते हैं सिर्फ 4 फेरे, क्या है इनका आध्यात्मिक महत्व

    Updated: Thu, 23 Jul 2026 08:53 PM (IST)

    सिख विवाह में 7 के बजाय केवल 4 फेरे लिए जाते हैं। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सामने यह शादी समपन्‍न होती है। जानिए सिख शादी की इस अनूठी परंपरा का पूरा ...और पढ़ें

    सिखों में शादी के लिए केवल 4 फेरे ही लिए जाते हैं।  (Picture Credit- AI Generated)

    सिखों में शादी के लिए केवल 4 फेरे ही लिए जाते हैं। (Picture Credit- AI Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर धर्म में शादी के अलग रीति-रिवाज होते हैं। जहां हिंदू धर्म में 7 फेरे होने के बाद ही शादी पूर्ण मानी जाती है, ठीक वैसे ही सिखों में शादी के लिए केवल 4 फेरे ही लिए जाते हैं।

    यह फेर किसी अग्निकुंड की गोलाई में घूमकर नहीं लिए जाते हैं। इस शादी में न कोई पंडित होता है और न ही किसी भी तरह का मंत्रोच्चारण होता है, बल्कि एक ज्ञानी रागी द्वारा गुरुवाणी का पाठ किया जाता है और इसी के साथ शादी की रस्में आगे बढ़ती हैं।

    इसे 'आनंद कारज' कहा जाता है। इसमें गुरु ग्रंथ साहिब जी को साक्षी मानकर 4 फेरे लिए जाते हैं, जिन्‍हे लावण कहा जाता है। चलिए जानते हैं कि सिखों शादी में चार फेरों का क्या आध्यात्मिक महत्व होता है?

    पहला फेरा

    इस फेरे में गृहस्थ जीवन की जिम्‍मेदारियों को ईमानदारी से निभाने और धर्म की राह पर चलने का वचन दिया जाता है। इस फेरे में वर-वधु वचन देते हैं कि, वो अपने अंदर की सारी बुराइयों को त्‍याग देंगे और एक दूसरे के प्रति ईमानदार रहेंगे।

    दूसरा फेरा

    शादी के बाद एक दूसरे से किसी भी बात को लेकर भय हो या अहंकार हो, तो वह रिश्‍ता नहीं चल सकता है। इसलिए दूसरे फेरे में वर और वधू यह वचन लेते हैं कि वे एक-दूसरे के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित रहेंगे और रिश्ते में एक-दूसरे को बराबर का दर्जा देंगे।

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    तीसरा फेरा

    इस फेरे में दोनों एक दूसरे को वचन देते हैं कि पूरी जिंदगी उनके प्रेम में कोई कमी नहीं आएगी। एक दूसरे के प्रति वो न केवल सच्‍चे प्रेम की भावना रखेंगे बल्कि एक दूसरे को सम्‍मान भी देंगे।

    चौथा फेरा

    यह फेरा इस बात का प्रतीक होता है कि अब वर और वधु दोनों एक ही हैं। दोनों पति-पत्‍नी के बंधन में जीवन भर बंधे रहने के लिए तैयार हैं। यह फेरा जीवनभर साथ निभाने का वचन देना होता है।

    आखिरी फेरे के बाद 'आनंद साहिब' का पाठ किया जाता है और गुरु साहिब की उपस्थिति में जोड़े को विवाहित माना जाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।