क्या सच में चौखट पर बैठने से होता है अपशकुन? पढ़ें बड़े-बुजुर्गों की डांट का पूरा सच
यह लेख बताता है कि हिंदू धर्म में घर की चौखट पर बैठना अपशकुन क्यों माना जाता है, जैसा कि बड़े-बुजुर्ग अक्सर टोकते हैं। इसमें ज्योतिष, वास्तु और पौराणि ...और पढ़ें

चौखट पर बैठने से क्यों होता है अपशकुन (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
चौखट घर की मर्यादा, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक
दहलीज पर बैठने से मां लक्ष्मी का आगमन रुकता है
भगवान नरसिंह अवतार से जुड़ा है चौखट का रहस्य
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। "अरे! चौखट पर मत बैठो, अपशकुन होता है…" हम में कई लोगों ने कभी न कभी अपनी लाइफ में अपनी दादी-नानी से ये लाइन जरूर सुनी होगी। हिंदू धर्म में कई ऐसी मान्यताएं और आदतें प्रचलित हैं, जिसे लेकर अक्सर हमारे बड़े-बुजुर्ग टोकते रहते हैं।
घर की चौखट यानी दहलीज पर बैठना इन्हीं में से एक है, जिसके लिए बड़े-बुजुर्ग हमें तुरंत टोक देते थे, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हमारी दादी-नानी के उस सख्त लहजे के पीछे की असल वजह क्या थी? क्या यह सिर्फ एक वहम है या फिर इसके पीछे कोई गहरा आध्यात्मिक और पौराणिक कारण छिपा है? आइए, धर्म और ज्योतिष के नजरिए से जानते हैं इसके बारे में विस्तार से-
सिर्फ लकड़ी का ढांचा नहीं है चौखट
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा जी ने इस विषय पर बहुत ही अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि, हमारे घर की चौखट सिर्फ ईंट, पत्थर या लकड़ी से बना कोई साधारण ढांचा नहीं है। हिंदू धर्म में इसे घर की मर्यादा, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा की एक बेहद पवित्र सीमा माना गया है। यह वह लक्ष्मण रेखा है, जो बाहरी दुनिया की नकारात्मकता को हमारे घर के पवित्र और शांत वातावरण से अलग करती है।
मां लक्ष्मी के आगमन में रुकावट
चंद्रेश शर्मा जी बताते हैं कि ज्योतिष शास्त्र और वास्तु की मानें, तो मुख्य द्वार से ही घर में सुख, समृद्धि और धन की देवी मां लक्ष्मी का प्रवेश होता है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति घर की दहलीज पर बैठता है, तो वह अनजाने में ही मां लक्ष्मी के घर में आने का रास्ता रोक देता है। इससे घर की आर्थिक संपन्नता पर बुरा असर पड़ता है।
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इसके अलावा, ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी चौखट पर ज्यादा देर बैठने या खड़े रहने से कुंडली में क्रूर ग्रह 'राहु' के दुष्प्रभाव सक्रिय हो जाते हैं, जो जीवन में बेवजह का मानसिक तनाव और अचानक आने वाली परेशानियों का कारण बन सकते हैं।
भगवान नरसिंह से जुड़ा रहस्य
इस नियम के पीछे एक बेहद शक्तिशाली पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है। विष्णु पुराण के अनुसार, हिरण्यकश्यप के वध के लिए भगवान विष्णु ने 'नरसिंह अवतार' लिया था। उसे मिले वरदान के मुताबिक हिरण्यकश्यप का वध न तो घर के अंदर हुआ और न ही बाहर, बल्कि श्रीहरि ने उसे 'चौखट' पर अपनी जांघों पर रखकर मारा था। इसी वजह से चौखट को एक 'संधि काल' का प्रतीक माना जाता है। यह एक ऐसा स्थान है, जहां अत्यधिक उग्र ऊर्जा का वास होता है, इसलिए यहां बैठना शास्त्रों में वर्जित है।
दरिद्रता का वास
इसके अलावा शास्त्रों में यह भी साफ रूप से बताया गया है कि घर की चौखट पर बैठकर कभी भी भोजन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसे दरिद्रता को बुलावा देने वाला काम माना गया है।
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