रामायण में त्रिजटा का सपना लंका के विनाश का संकेत क्यों माना गया?
रामायण में त्रिजटा राक्षसी ने सीता को लंका के विनाश और रावण के पतन का स्वप्न सुनाया। यह स्वप्न सुंदरकांड में वर्णित है, जिसमें राम की विजय और रावण की हार के स्पष्ट संकेत थे।

त्रिजटा का स्वप्न: रामायण में लंका के विनाश की भविष्यवाणी (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण से जुड़ी कई ऐसी कहानियां हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि उनकी वजह से ही राम और रावण के बीच युद्ध हुआ था। ऐसे ही रामायण में सुंदरकांड है जिसमें अध्याय 27 में इस बात का जिक्र किया गया है कि त्रिजटा राक्षसी को पहले से ही इस बात का अनुमान हो गया था कि जल्द ही लंका का विनाश होने वाला है।
जब भगवान श्रीराम की पत्नी सीता लंका के उद्यानों में कैद थीं, तब उनकी रक्षा कई राक्षसियां कर रही थीं, जिनमें त्रिजटा नाम की एक बुद्धिमान और वृद्ध राक्षसी भी शामिल थी। त्रिजटा को माता सीता का शुभचिंतक माना जाता था और वह हमेशा उनकी रक्षा के लिए कार्य करती थी।
ऐसे ही एक दिन, जब माता सीता अशोक वाटिका में शोक में बैठी थीं, तब त्रिजटा ने उन्हें अपना एक भयावह और भविष्य के बारे में बताने वाला स्वप्न सुनाया था। उस स्वप्न में रावण के पतन और प्रभु श्री राम की विजय के संकेत थे। आइए जानें वह स्वप्न कैसे लंका के विनाश का संकेत दे रहा था।
त्रिजटा का स्वप्न अशुभ संकेतों से भरा था
अशोक वाटिका में माता सीता की रक्षा करने वाली राक्षसी त्रिजटा का सपना कई अशुभ संकेतों से भरा हुआ था। इस स्वप्न में रावण की पराजय का संकेत था। उस समय त्रिजटा ने अन्य राक्षसियों को इकठ्ठा करके अपने स्वप्न के बारे में बताया जिसमें यह कहा गया कि लंका का विनाश निश्चित है और सीता को छोड़ देना ही बेहतर होगा। उस समय त्रिजटा ने यह बताया कि उसने एक दुःस्वप्न देखा है जिसमें प्रभु श्री राम लंका आए हैं और रावण के साथ लंका का विनाश भी हो गया है।
त्रिजटा का स्वप्न जो लंका के विनाश का संकेत था
अपने स्वप्न में त्रिजटा ने भगवान राम और उनके निष्ठावान भाई लक्ष्मण को लंका की ओर जाते देखा। उसने यह भी देखा कि वो पैदल या साधारण रथों पर नहीं, बल्कि रावण के अपने ही दिव्य रथ, पुष्पक विमान पर सवार होकर लंका आ रहे हैं। पुष्पक विमान से रावण का पराजित और निर्जीव शरीर लटका हुआ था, जो उसके पतन को दिखा रहा था। स्वप्न में रावण काले वस्त्र पहने हुए था जो एक भयावह प्रतीक था।
रामायण में है इस सपने का वर्णन
रामायण के सुंदरकांड में एक चौपाई है जो त्रिजटा के सपने के बारे में बताती है-
त्रिजटा नाम राच्छसी एका।राम चरन रति निपुन बिबेका॥
सबन्हौ बोलि सुनाएसि सपना। सीतहि सेइ करहु हित अपना॥
सपनें बानर लंका जारी। जातुधान सेना सब मारी ॥
खर आरूढ़ नगन दससीसा। मुंडित सिर खंडित भुज बीसा
इसका मतलब यह है कि- एक त्रिजटा नाम की राक्षसी थी। उसकी श्रीरामचन्द्रजी के चरणों में प्रीत थी और वह ज्ञान में बहुत निपुण थी। उसने सभी को बुलाकर अपना स्वप्न सुनाया और कहा कि सीताजी की सेवा करके अपना कल्याण कर लो।
सपने में एक बंदर ने लंका जला दी। राक्षसों की सारी सेना मार डाली गई। दसानन रावण नग्न है और गधे पर सवार है। उसका सिर मुंडवा दिया गया है और उसकी बीसों भुजाएं कटी हुई हैं।
त्रिजटा का यह स्वप्न सीधे तौर पर लंका और रावण के विनाश का संकेत दे रहा था और यह भी बता रहा था कि रावण यदि माता सीता को मुक्त कर दे, तो इस विनाश से बचा जा सकता है। रामायण की यह कथा इस बात का स्मरण दिलाती है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न प्रतीत हो, सत्य के सामने उसका पतन निश्चित होता है।
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