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    आखिर माता कैकेयी ने भगवान श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास ही क्यों मांगा? पढ़ें रामायण में छिपा रहस्य

    Updated: Mon, 08 Jun 2026 02:30 PM (IST)

    क्या आपने कभी सोचा है कि माता कैकेयी ने भगवान श्रीराम के लिए 13 या 15 नहीं, बल्कि पूरे 14 वर्ष का ही वनवास क्यों मांगा था? आइए आपको बताते हैं  रामायण ...और पढ़ें

    वनवास के लिए 14 का अंक ही क्यों चुना गया? (Picture Credit AI- Generated Image)

    वनवास के लिए 14 का अंक ही क्यों चुना गया? (Picture Credit AI- Generated Image) 

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण ग्रंथ रामायण है। इस ग्रंथ में ऐसे कई प्रसंग देखने को मिलते हैं, जिनसे कोई बड़ी सीख मिलती है। रामायण के अनुसार, आयोध्या के राजा दशरथ से माता कैकेयी 2 वरदान मांगती हैं।

    एक भरत के लिए राज्य का राजसिंहासन और भगवान श्रीराम के लिए 14 साल का वनवास, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर माता कैकेयी ने भगवान श्रीराम के लिए 14 साल का ही वनवास क्यों मांगा? अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं रामायण के इस खास प्रसंग के बारे में।

    आखिर क्यों तय की गई 14 साल की ही अवधि?

    वाल्मीकि रामायण के अनुसार, त्रेता युग की प्रशासनिक व्यवस्था में एक राज्याधिकार का खास नियम था। अगर कोई राजा लगातार 14 साल तक अपने राजसिंहासन से दूर रहता है, तो ऐसे में उसके सिंहासन पर उसका अधिकार खत्म हो जाता है।
    कैकेयी अधिक चतुर दासी थी और मंथरा को त्रेता युग के इस नियम के बारे में जानकारी थी। उसने माता कैकेयी को बताया कि अगर भगवान श्रीराम 14 साल तक अयोध्या से दूर रहेंगे, तो ऐसे में वह 14 साल के बाद कानूनी रूप से अयोध्या के राजा बनने का दावा नहीं कर सकेंगे, जिसकी वजह से अयोध्या का राजपाट भरत का हो जाएगा, लेकिन इसके बाद भी भरत ने राम जी जी राजगद्दी को हाथ नहीं लगाया और भगवान श्रीराम के नाम पर ही राज्य को चलाया।

    किसी भी राज्य के राजा को मंत्रियों और सेना का विश्वास जीतने के लिए और अपनी सत्ता को मजबूत करने के लिए लंबा समय लगता है। माता कैकेयी का मानना था कि भरत के लिए राज्य की सत्ता को मजबूत करने के लिए 14 साल का समय अधिक है। जब भगवान श्रीराम 14 साल का वनवास पूरा करके आएंगे, तो अयोध्या की पूरी ताकत भरत के नियंत्रण में आ चुकी होगी। इसलिए माता कैकेयी ने भगवान श्रीराम के लिए राजा दशरथ से 14 साल का वनवास मांगा।

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    रामायण में मिलता है वर्णन

    माता कैकेयी के द्वारा भगवान श्रीराम के लिए 14 साल का वनवास मांगने का प्रसंग वाल्मीकि रामायण के अयोध्या कांड में देखने को मिलता है।

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    रामायण में कौन थी माता कैकेयी

    माता कैकेयी राजा की दशरथ तीन रानियों में एक थीं। उनका एक पुत्र था, जिसका नाम भरत था। मंथरा के बहकावे में आने पर माता कैकेयी ने राजा दशरथ से 2 वरदान मांगे थे।
    पहला वरदान - भरत को अयोध्या का राजा बनाया जाए।
    दूसरा वरदान- भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास दिया जाए।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।