लंकापति रावण को मिले थे ये 4 भयंकर श्राप, जिनके कारण सोने की लंका जलकर हो गई खाक
रामायण के अनुसार, लंकापति रावण को नंदी, वेदवती, नलकुबेर और माया जैसे कई लोगों से भयंकर श्राप मिले थे। इन्हीं श्रापों के कारण उसकी सोने की लंका जलकर खा ...और पढ़ें

रावण को किसने दिया था श्राप? (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण में बेहद शक्तिशाली लंकापति रावण था। उसका अंत भगवान श्रीराम के बाणों से नहीं, बल्कि उसके अहंकार की वजह से हुआ था। रावण में अधिक शक्तियां थी, जिसकी वजह से उसने घोर अत्याचार किए। लंकापति रावण ने जीवन के दौरान ऐसी कई गलतियां की, जिसकी वजह से उसे कई भयंकर श्राप।
इन्हीं श्राप की वजह से लंका जलकर हो खाक गई। अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि रावण को किस-किस ने श्राप दिया था, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि रामायण के इस प्रसंग के बारे में।
1. नंदी का श्राप
एक बार रावण महादेव से मिलने के लिए कैलाश पर्वत गया। वहां पर नंदी को देख मजाक उड़ाने लगा। इससे नंदी ने अपमानित होकर रावण को श्राप दिया कि जिस वानर रूप का तूने मजाक उड़ाया है। आने वाले दिनों में वानर प्रजाति लंका का विनाश करेगी। इसी श्राप की वजह रावण की लंका में हनुमान जी ने आग लगा दी और रावण का घमंड चूर किया।
2. सती वेदवती का श्राप
भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए वेदवती तपस्या कर रही थीं। इस दौरान रावण की नजर वेदवती पर पड़ी। रावण ने वेदवती की तपस्या को भंग करने का प्रयास किया। इसके बाद वेदवती ने रावण को अपवित्र मानते हुए को खुद को भस्म कर लिया। भस्म होने से पहले उसने रावण को श्राप दिया कि मैं तुम्हारे विनाश करने के लिए अगला जन्म लूंगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, वेदवती ने अगला जन्म माता सीता के रूप में लिया। वनवास के दौरान सीता हरण के बाद रावण का अंत हुआ।
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3. नलकुबेर का श्राप
एक बार रावण ने स्वर्ग लोक पर आक्रमण किया था। इस दौरान उसने अप्सरा रंभा को देखा। अप्सरा रंभा रावण के भाई कुबेर के पुत्र नलकुबेर की पत्नी थी। उस पर रावण की गलत नजर पड़ी।
इसके बाद जब इस बात की जानकारी नलकुबेर को हुई, तो उसने रावण को श्राप दिया कि अगर कभी स्त्री की इच्छा के विरुद्ध उसे छुआ, तो तेरे सौ टुकड़े हो जाएंगे। इसी श्राप की वजह से रावण माता सीता को छू नहीं पाया।
4. माया का श्राप
मंदोदरी की बहन माया थी। उसका विवाह राजा शंबर से हुआ था। लंकापति रावण ने राजा शंबर का वध किया। इसके बाद माया को अपने साथ ले जाने लगा। इससे माया बेहद दुखी हुई और क्रोध में आकर रावण को श्राप दिया कि तुमने मेरा सुहाग उजाड़ा है। तुम्हारी वासना एक दिन तुम्हारी मृत्यु और तुम्हारी लंका के विनाश का कारण बनेगी। लंकापति रावण को मिले इन भयंकर श्रापों का वर्णन वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड में मिलता है।
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