क्या आप जानते हैं राजा दशरथ ने अपनी बेटी को क्यों दे दिया था गोद? पढ़ें ये भावुक कथा
राजा दशरथ और माता कौशल्या की पुत्री शांता को संतानहीन मित्र राजा रोमपाद और रानी वर्षिणी को गोद दिया गया था। शांता के पति ऋषि ऋष्यश्रृंग ने ही दशरथ के ...और पढ़ें

राजा दशरथ ने राजा रोमपद को क्यों दी अपनी संतान? (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान राम और उनके तीन भाइयों के बारे में हर कोई जानता है, लेकिन बहुत ही कम लोगों को राम जी की बड़ी बहन शांता के बारे में पता हो। शांता राजा दशरथ और माता कौशल्या की संतान थीं।
देवी शांता सर्वगुण संपन्न युद्ध कला में निपुण थीं, लेकिन ऐसा क्या हुआ कि राजा दशरथ ने लाडली बेटी को गोद दे दिया? क्या आप जानते हैं इसकी वजह के बारे में। अगर नहीं पता, तो आइए आपको बताते हैं रामायण के इस खास प्रसंग के बारे में।
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पौराणिक कथा के अनुसार, राजा रोमपद राजा दशरथ के घनिष्ठ मित्र थे। राजा रोमपाद और रानी वर्षिणी के पास सब कुछ था, लेकिन उनको संतान की प्राप्ति नहीं हुई। इसी बात को लेकर राजा रोमपाद और रानी वर्षिणी दुखी रहते थे। एक बार वे दोनों अयोध्या पहुंचे। वहां शांता को देख उन्होंने कहा कि काश! मेरी भी शांता जैसी कोई पुत्री होती।
राजा दशरथ ने दिया ये वचन
राजा रोमपाद और रानी वर्षिणी के दुख को देख राजा दशरथ भावुक हो गए। राजा दशरथ ने उनको वचन दिया कि वे अपनी पुत्री शांता को उन्हें गोद दे देंगे। इसके बाद राजा दशरथ और रानी कौशल्या ने उन दोनों को अपनी बेटी शांता को गोद दिया।
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पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार ऐसा समय आया जब अंग देश में सूखा पड़ा। ऐसे में ऋषि ऋष्यश्रृंग के द्वारा यज्ञ करने से बारिश हुई। ऋषि ऋष्यश्रृंग के काम को देख राजा रोमपाद प्रसन्न हुए और उन्होंने शांता का विवाह ऋषि ऋष्यश्रृंग से करवा दिया। कई वर्षों तक राजा दशरथ को पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई थी।
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ऋष्यश्रृंग ने किया पुत्रकामेष्टि यज्ञ
इसी वजह से राजा दशरथ उत्तराधिकारी के लिए चिंतित रहने लगे। ऐसे में महर्षि वशिष्ठ ने राजा दशरथ को पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाने की सलाह दी। यह महान को शांता के पति ऋषि ऋष्यश्रृंग ने किया था। इसी यज्ञ की वजह से कौशल्या से राम, कैकेयी से भरत और सुमित्रा से लक्ष्मण व शत्रुघ्न का जन्म हुआ। इस प्रसंग का वर्णन वाल्मीकि रामायण के बाल कांड में मिलता है। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में श्रृंगी ऋषि और देवी शांता का एक मंदिर भी है, जहां उनकी पूजा की जाती है।
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