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    वरदान या फिर कोई श्राप? कुंभकर्ण ने क्यों मांगी थी 6 महीने सोने की सजा, पढ़ें रामायण का अनसुना प्रसंग

    Updated: Mon, 01 Jun 2026 04:00 PM (GMT+05:30)

    धार्मिक ग्रंथ रामायण में कुंभकर्ण के 6 महीने सोने के वरदान का रोचक प्रसंग बताया गया है। देवताओं की प्रार्थना पर देवी सरस्वती के प्रभाव से कुंभकर्ण ने ...और पढ़ें

    रामायण का दिलचसप प्रसंग (Image Source: AI-Generated)

    रामायण का दिलचसप प्रसंग (Image Source: AI-Generated)  

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। धार्मिक ग्रंथ रामायण में कुंभकर्ण का प्रसंग बेहद रोचक है। लंकापति रावण का भाई कुंभकर्ण बलवान और पराक्रमी था। कुंभकर्ण ने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए लंबे समय तक तपस्या की। वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड के अनुसार, कुंभकर्ण ने ब्रह्मा जी से इंद्रासन की जगह निद्रासन वरदान मांगा था, लेकिन क्या आप जानते हैं ये वरदान कुंभकर्ण ने क्यों मांगा। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए आपको बताते हैं इस प्रसंग के बारे में विस्तार से।

    कुंभकर्ण ने ब्रह्मा जी को किया प्रसन्न

    कुंभकर्ण ने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए लंबे समय तक तपस्या की। जब ब्रह्मा जी कुंभकर्ण को वरदान देने के लिए अवतरित हुए, तो कुंभकर्ण ब्रह्मा जी से इंद्रासन मांगना चाहता था। ब्रह्मा जी जानते थे कि अगर कुंभकर्ण को इंद्रासन मिल गया, तो वह पूरी सृष्टि में तबाही मचा देगा और तीनों लोकों में हाहाकार मच जाएगा।

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    (Image Source: AI-Generated)  

    इस संकट से बचाव के लिए देवताओं ने वाणी की देवी मां सरस्वती ने प्रार्थना की। वे कुंभकर्ण की जीभ पर जाकर बैठ गईं। जब कुंभकर्ण ने ब्रह्मा जी से वरदान मांगा, तो सरस्वती जी के असर से कुंभकर्ण के मुंह से इंद्रासन की जगह निद्रासन निकल गया। ब्रह्मा जी ने तथास्तु कह दिया।

    रावण ने ब्रह्मा जी से की प्रार्थना

    लंकापति रावण अपने भाई को इतने लंबे समय तक सोता देख परेशान और दुखी हो गया। उसने ब्रह्मा जी से प्रार्थना की, हे पितामह! आपका यह वरदान मेरे भाई के लिए मृत्यु जैसा है। वह हमेशा सोता ही रहेगा। आप इस वरदान को वापस ले लीजिए या फिर इस वरदान को कम कर दीजिए, लेकिन वरदान पूरी तरह वापस नहीं लिया जा सकता था। इसी वजह से ब्रह्मा जी ने रावण की प्रार्थना पर एक शर्त रखी। ब्रह्मा जी ने कहा कि कुंभकर्ण साल के 6 महीने सोएगा और केवल 1 दिन के लिए जागेगा।"

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    ब्रह्मा जी ने बताया जिस एक दिन कुंभकर्ण जागेगा, तो उस दिन उसे बहुत तेज भूख लगेगी। पूरे लोक में घूमकर भरपेट भोजन करेगा और फिर वापस 6 महीने के लिए सो जाएगा। इसके साथ ही ब्रह्मा जी ने रावण के सामने एक और शर्त भी रखी। उन्होंने कहा कि अगर 6 महीने से पहले कोई कुंभकर्ण को जगाएगा, तो वह युद्ध में मारा जाएगा।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।