ताड़का को अगस्त्य ऋषि ने क्यों दिया था राक्षसी बनने का श्राप? पढ़ें रामायण का अनसुना रहस्य
रामायण काल की राक्षसी ताड़का को अगस्त्य मुनि ने श्राप क्यों दिया था, यह लेख बताता है। राजा सुकेतु की पुत्री ताड़का, अपने पति सुंद के उत्पात और बाद में ...और पढ़ें

किसके श्राप से ताड़का बनी राक्षसी? (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण काल की एक खूंखार राक्षसी थी ताड़का, जिसका वध भगवान श्री राम ने किया था। ताड़का जन्म से राक्षसी नहीं थी। उसे अगस्त्य मुनि ने राक्षसी का श्राप दिया था, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों अगस्त्य मुनि ने ताड़का को राक्षसी बनने का श्राप दिया था। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए आपको इस लेख में बताते हैं इसकी वजह के बारे में।

ताड़का कैसे बनी राक्षसी?
पौराणिक कथा के अनुसार, सुकेतु नाम के राजा थे, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी। इसलिए वह दुखी रहते थे। संतान की प्राप्ति के लिए उन्होंने ब्रह्मा जी की तपस्या की। उनकी तपस्या से ब्रह्मा जी प्रसन्न हुए और राजा को एक पुत्री का वरदान दिया। राजा ने पुत्री का नाम ताड़का रखा। ताड़का बलशाली और बेहद सुंदर भी थी। उसका विवाह सुंद के साथ हुआ। इसके बाद तड़का को 2 पुत्रों की प्राप्ति हुई, जिसका नाम सुबाहु और मारीच था। ताड़का का पति बेहद बलवान और राक्षस प्रवृत्ति का था। इसलिए वह धार्मिक कामों में बाधा डालता था।
अगस्त्य ऋषि हुए बेहद क्रोधित
एक बार उसने अगस्त्य ऋषि के आश्रम पर हमला किया। इस दौरान उसने वहां पर भारी उत्पात मचाया। इस काम को देख अगस्त्य ऋषि क्रोधित हुए और उन्होंने सुंद को श्राप देकर भस्म कर दिया। पति मृत्यु के बाद ताड़का क्रोधित हुई और उसने अपने पुत्रों को लेकर ऋषि अगस्त्य के आश्रम पर हमला दिया। ऋषि ताड़का का वध नहीं कर पाया, लेकिन उन्होंने ताड़का को कुरूप महिला बनने का श्राप दिया। इसके बाद ताड़का नरभक्षी और कुरूप स्त्री बन गई। इसके बाद ताड़का सरयू नदी के पास रहने लगी और वन में रहने वाले ऋषियों को सताना शुरू कर दिया। ऋषियों को मार कर खाने लगी।
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महर्षि विश्वामित्र ने राजा दशरथ से कही ये बात
श्राप की वजह से ताड़का और उसके पुत्रों ने वन में आतंक मचाना शुरू कर दिया था। उनका मुख्य उद्देश्य था ऋषि-मुनियों के पवित्र कार्यों को नष्ट करना था। जब महर्षि विश्वामित्र यज्ञ कर रहे थे, तो ताड़का और उसके पुत्र यज्ञ में बार-बार बाधा डाल रहे थे। राक्षसों के इस उत्पात को देख महर्षि विश्वामित्र परेशान होकर राजा दशरथ के पास पहुंचे। उन्होंने राजा दशरथ से कहा कि श्रीराम और लक्ष्मण राक्षसों के वध के लिए उनके साथ भेजें। इसके बाद भगवान श्रीराम ने बाणों से ताड़का का वध किया। इस प्रसंग का वर्णन वाल्मीकि रामायण के बाल काण्ड में मिलता है।
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