कुंभकर्ण का वध: भगवान श्रीराम ने किस अचूक अस्त्र से किया था रावण के महाबली भाई का अंत?
रामायण के युद्ध में भगवान श्रीराम ने कुंभकर्ण का वध देवराज इंद्र द्वारा दिए गए ऐन्द्रास्त्र से किया था। कुंभकर्ण ने वानर सेना को भारी नुकसान पहुंचाया ...और पढ़ें

किसने किया कुंभकर्ण का वध? (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
श्रीराम ने कुंभकर्ण का वध ऐन्द्रास्त्र से किया था
यह अस्त्र देवराज इंद्र ने श्रीराम को दिया था
कुंभकर्ण ने वानर सेना को भारी क्षति पहुंचाई थी
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रामायण में लंका युद्ध को लेकर कई महाप्रसंग हैं, जिनमें कुंभकर्ण का वध भी शामिल है। लंकापति रावण के वध के बाद कुंभकर्ण को उसकी छह महीने की गहरी निद्रा के समय से पहले जगाया और युद्ध की भूमि में कुंभकर्ण वानर सेना का भारी विनाश करने लगा। ऐसे में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम स्वयं आगे आए।
इसके बाद भगवान श्रीराम ने दिव्य बाणों की मदद से कुंभकर्ण का सिर धड़ से अलग कर दिया, लेकिन क्या आप जानते हैं कि राम जी ने जिस अस्त्र से कुंभकर्ण का वध किया। वो अस्त्र राम जी को किसने दिया था। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इस प्रसंग के बारे में।
राम जी का कुंभकर्ण का युद्ध
पौराणिक कथा के अनुसार, कुंभकर्ण का वध करने के लिए श्रीराम जी ने देवराज इंद्र के द्वारा दिया गया ऐन्द्रास्त्र का इस्तेमाल किया था। जब कुंभकर्ण सुग्रीव, हनुमान और अंगद समेत वानर सेना का सामना नहीं कर पा रहा था, तो कुंभकर्ण वानरों को मुट्ठी में भींचकर और पैरों तले रौंदकर उनका अंत करने लगा। इस स्थिति को देखते हुए श्रीराम स्वयं अपने धनुष को लेकर उसके सामने आए। दोनों के बीच भयंकर युद्ध शुरू हो गया।
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राम जी ने बाणों से कुंभकर्ण के शरीर को छलनी कर दिया। जब कुंभकर्ण एक भयानक अस्त्र लेकर श्रीराम पर झपटा, तो श्रीराम ने वायव्यास्त्र का प्रयोग किया। इस बाण के प्रहार से कुंभकर्ण का वह हाथ कटकर गिर गया, जिसमें उसने अस्त्र थाम रखा था। इसके बाद भी कुंभकर्ण राम जी की तरफ बढ़ा, तो प्रभु श्रीराम ने देवराज इंद्र के अचूक ऐन्द्रास्त्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया।
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उसका कटा हुआ सिर लंका के मुख्य द्वार पर जा गिरा और उसका विशाल धड़ समुद्र में समा गया। कुंभकर्ण का वध करने के लिए राम ने देवराज इंद्र के अचूक ऐन्द्रास्त्र का प्रयोग किया था। रामायण के युद्ध काण्ड के 67वें अध्यायमें कुंभकर्ण और श्रीराम के बीच युद्ध का वर्णन किया गया है।
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