क्या आप जानते हैं लक्ष्मण जी ने क्यों काटी शूर्पणखा की नाक? पढ़ें रामायण में छिपा रहस्य
रामायण में लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा की नाक काटने का प्रसंग महत्वपूर्ण है। शूर्पणखा ने राम-लक्ष्मण को विवाह का प्रस्ताव दिया, अस्वीकार होने पर सीता पर ह ...और पढ़ें

शूर्पणखा की वो एक गलती जिसने श्रीराम को भी हैरान कर दिया(Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। धार्मिक ग्रंथ रामायण में कई महत्वपूर्ण प्रसंग देखने को मिलते हैं, जिसमें शूर्पणखा का प्रसंग भी शामिल है। शूर्पणखा एक राक्षसी और रामायण की एक प्रमुख पात्र थी। वह लंकापति रावण, कुंभकर्ण और विभीषण की बहन थी।
वनवास के दौरान भगवान श्रीराम के आदेश पर लक्ष्मण जी ने शूर्पणखा की नाक काट दी, लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर क्यों लक्ष्मण जी ने शूर्पणखा की नाक काटी। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं रामायण के इस प्रसंग के बारे में विस्तार से।
लक्ष्मण जी ने क्यों काटी शूर्पणखा की नाक
वनवास के समय पंचवटी में शूर्पणखा का आगमन हुआ। इस दौरान राम जी को देख शूर्पणखा मोहित हो गई और उस राक्षसी ने भगवान श्रीराम के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा, लेकिन राम जी विवाहित थे। इसलिए उन्होंने शूर्पणखा के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इसके बाद शूर्पणखा ने लक्ष्मण जी के सामने प्रस्ताव रखा, लेकिन लक्ष्मण जी ने भी मना कर दिया।
शूर्पणखा ने धारण किया राक्षसी का रूप
इससे शूर्पणखा को क्रोध आया है और उसने राक्षसी का रूप धारण किया। इसके बाद शूर्पणखा मां सीता को मारने के लिए झपटी। ऐसे में भगवान श्रीराम के कहने पर और सीता जी की रक्षा के लिए लक्ष्मण जी ने तलवार निकाली शूर्पणखा की नाक की काट दी।
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माता सीता के हरण के लिए तैयार हुआ रावण
इसके बाद शूर्पणखा अपने भाई लंकापति रावण के पास पहुंची, वहां पर उसने घटना के बारे में रावण को बताया। इस दौरान उसने माता सीता के सौंदर्य के बारे में भी बताया। इसके बाद रावण माता सीता के हरण के लिए तैयार हो गया। इस प्रकार से शूर्पणखा भगवान श्रीराम रावण युद्ध का मुख्य वजह बनी। शूर्पणखा और लक्ष्मण जी के इस प्रसंग का वर्णन वाल्मीकि रामायण' के अरण्यकाण्ड में मिलता है।
विद्युज्जिह्व से हुआ था शूर्पणखा का विवाह
शूर्पणखा महर्षि विश्रवा और राक्षसी कैकसी की पुत्री थी। शूर्पणखा का विवाह कालकेय वंश के एक दानव राजकुमार विद्युज्जिह्व से हुआ था। विद्युज्जिह्व रावण की लंका पर अधिकार करना चाहता था।
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रावण ने बनाया पंचवटी क्षेत्र का शासक
पति की मृत्यु के बाद शूर्पणखा रोते हुए रावण के पास पहुंची, तो रावण ने अपनी बहन को पंचवटी क्षेत्र का शासक बना दिया और उसकी रक्षा के लिए खर और दूषण को 14,000 राक्षसों को वहां पर नियुक्त किया। इसके बाद पंचवटी में ही शूर्पणखा ने अपना जीवन यापन किया।
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