बैठी या खड़ी मुद्रा? घर के लिए कौन-सी गणेश मूर्ति है सबसे शुभ, अभी जान लें नियम और सही दिशा
घर में सुख-समृद्धि और शांति के लिए गणेश जी की मूर्ति स्थापित करने के वास्तु नियमों को जानना महत्वपूर्ण है। बैठी हुई मुद्रा, बाईं ओर सूंड वाली मूर्ति औ ...और पढ़ें

गणेश जी की ऐसी मूर्ति चमका देगी आपकी किस्मत (AI-Generated Image)
HighLights
बैठी मुद्रा वाली गणेश मूर्ति घर में लाती है सुख-समृद्धि
बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी की स्थापना शुभ मानी जाती है
गणेश मूर्ति के लिए उत्तर-पूर्व दिशा सबसे उत्तम है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अगर आप घर में सुख-समृद्धि, शांति चाहते हैं, तो इसके लिए घर में गणेश जी की मूर्ति को विराजमान करें। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में गणेश जी की मूर्ति होने से काम में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
ऐसा माना जाता है कि गलत मुद्रा और गलत दिशा में भगवान गणेश की मूर्ति को रखने से परिवार के सदस्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि कैसी होनी चाहिए गणेश जी की मूर्ति और दिशा के नियम के बारे में।
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(AI-Generated Image)
बैठी या खड़ी मुद्रा- वास्तु शास्त्र के अनुसार, बैठी हुई मुद्रा वाली गणेश जी की मूर्ति को शुभ माना जाता है। इस तरह की मूर्ति को घर में विराजमान करने से घर में धन और खुशियों का आगमन होता है। साथ ही परिवार के सदस्यों के बीच सुख-शांति बनी रहती है।
खड़ी मुद्रा वाली मूर्ति- घर में भगवान गणेश की खड़ी मुद्रा वाली मूर्ति को नहीं रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार, खड़ी मुद्रा वाली मूर्ति को ऑफिस या दुकान में रखना चाहिए, जिससे काम में गति बनी रहे।
बाई ओर मुड़ी सूंड- बाई तरफ मुड़ी हुई सूंड वाले गणपत्ति की मूर्ति को घर में विराजमान करना चाहिए। बाई तरफ की मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी की साधना करने से घर में सुख और शांति आगमन होता है।
दाई ओर मुड़ी सूंड- दाई तरफ मुड़ी सूंड वाले गणेश जी को सिद्धि विनायक कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि सिद्धि विनायक की पूजा में कोई चूक हो जाए, तो दोष लगता है। ऐसी मूर्ति को मंदिरों में ही रखा जाता है।
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सही दिशा और स्थापना के नियम
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में गणेश जी की मूर्ति को विराजमान करने के लिए उत्तर-पूर्व दिशा दिशा को शुभ माना जाता है। इसके अलावा उत्तर या पश्चिम दिशा में भी गणेश जी को विराजमान किया जा सकता है। इस नियम का पालन करने से गणेश जी की पूजा सफल होती है और जीवन में कोई बाधा नहीं आती।
इन बातों का रखें ध्यान
मूर्ति को लेते समय ध्यान रखें कि गणेश जी के हाथ मोदक जरूर होना चाहिए। साथ ही मूर्ति में गणेश जी का वाहन मूषक होना चाहिए। इन दोनों चीजों के बिना गणपति बप्पा की मूर्ति अधूरी मानी जाती है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।