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    हरियाली तीज पर गलत दिशा में न करें शिव-पार्वती की स्थापना, तुरंत जान लें सही वास्तु नियम

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 07:00 PM (IST)

    हरियाली तीज पर शिव-पार्वती की मूर्ति स्थापना के लिए वास्तु नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण है। शुभ दिशा में मूर्ति रखने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति औ ...और पढ़ें

    शिव-पार्वती की मूर्ति के लिए कौन सी दिशा है शुभ? (AI-Generated Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन के महीने में हरियाली तीज का पर्व शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर सुहागिन महिलाएं वैवाहिक जीवन में खुशियों के आगमन और कुंवारी कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए महादेव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं। साथ ही विधिपूर्वक व्रत करती हैं।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन खुशहाल होता है और पति-पत्नी के रिश्ते मजबूत होते हैं। साथ ही विवाह में आ रही बाधा दूर होती है। इस दिन पूजा-पाठ और देवी-देवताओं की मूर्तियों को विराजमान शुभ दिशा में ही करना चाहिए। इससे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। साथ ही अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि हरियाली तीज के दिन शिव-पार्वती की मूर्ति को किस दिशा में विराजमान करना चाहिए।

    शिव-पार्वती की मूर्ति रखने के लिए कौन सी दिशा है शुभ?

    वास्तु शास्त्र में पूजा-पाठ, देवी-देवताओं के लिए शुभ दिशा का वर्णन किया गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, हरियाली तीज के दिन शिव-पार्वती की मूर्ति को उत्तर-पूर्व दिशा में विराजमान करना चाहिए। यह दिशा को देवताओं की मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में शिव-पार्वती की मूर्ति को विराजमान करने से घर में सुख-शांति का वास होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए कहा जाता है कि मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्ति को विराजमान करने से पहले शुभ दिशा के बारे में जरूर जान लें।

    अगर घर में उत्तर-पूर्व दिशा में शिव-पार्वती की मूर्ति को रखना संभव नहीं है, तो ऐसे में उत्तर दिशा में मूर्ति को विरजमान करना शुभ माना जाता है। इस दिशा में मूर्ति को विराजमान करने से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।

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    किस दिशा में न रखें मूर्ति?

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, भगवान शिव और मां पार्वती की मूर्ति को दक्षिण दिशा में भूलकर भी विराजमान नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इस दिशा में पितरों का वास माना जाता है। इस दिशा में पूजा करने से शुभ फल प्राप्त नहीं होता है।

    पूजा के समय किस दिशा में होना चाहिए मुख?

    ऐसा माना जाता है कि हरियाली तीज के दिन सही दिशा में मुख करके पूजा करने से पूर्ण फल प्राप्त होता है और महादेव के संग मां पार्वती की कृपा प्राप्त होती है। इसलिए पूजा के दौरान पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुख होना चाहिए।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।