Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    रोजाना पूजा करने पर भी घर में रहता है क्लेश? गलत दिशा में हो सकता है आपका मंदिर, पढ़ें वास्तु टिप्स

    Updated: Tue, 14 Apr 2026 01:00 PM (GMT+05:30)

    घर के मंदिर की सही दिशा सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए महत्वपूर्ण है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, उत्तर-पूर्व दिशा मंदिर के लिए शुभ मानी जाती है। ...और पढ़ें

    किस दिशा में होना चाहिए मंदिर? (AI Generated Image)

    किस दिशा में होना चाहिए मंदिर? (AI Generated Image)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। घर के मंदिर को बेहद महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। मंदिर में रोजाना सुबह और शाम पूजा-अर्चना, धूप-दीप और घंटी बजाने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही घर में सुख और शांति का आगमन होता है, लेकिन आपको पूजा का पूर्ण फल तभी प्राप्त होगा। जब घर का मंदिर सही दिशा में होगा।

    वास्तु शास्त्र में मंदिर (Vastu Tips for Temple) से जुड़े नियम के बारे में बताया गया है, जिनका पालन करने से पूजा सफल होती है और देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। चलिए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि घर का मंदिर किस दिशा में होना चाहिए और इससे जुड़े वास्तु नियम के बारे में।

    vastu tips  (70)

     

    मंदिर के लिए कौन-सी दिशा है शुभ

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, उत्तर-पूर्व दिशा को मंदिर के लिए अधिक शुभ मानी जाती है। इस दिशा में देवी-देवताओं का स्थान माना जाता है। इस दिशा में मंदिर होने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही पूजा सफल होती है। गलत दिशा में मंदिर होने से घर में क्लेश की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

    किस दिशा में होना चाहिए मुख?

    पूजा के दौरान आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि वास्तु के इस नियम का पालन करने से जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है। साथ ही धन में वृद्धि होती है।

    खबरें और भी

    इन जगहों पर नहीं होना चाहिए मंदिर

    • मंदिर सीढ़ियों के नीचे नहीं होना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि मंदिर सीढ़ियों के नीचे होने से परिवार के सदस्यों को वास्तु दोष का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही अशुभ फल की प्राप्ति होती है।
    • इसके अलावा मंदिर बाथरूम या टॉयलेट के पास नहीं होना चाहिए। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न हो सकती है।
    • वास्तु के अनुसार, दक्षिण दिशा को पितरों की मानी जाती है। इसलिए इस दिशा में मंदिर बनवाने की गलती न करें।

    इन बातों का रखें ध्यान

    • मंदिर के अंदर चौकी पर देवी-देवताओं की मूर्तियां रखनी चाहिए। भूलकर भी मूर्ति को जमीन पर न रखें।
    • मंदिर की दीवार का रंग काला नहीं होना चाहिए, क्योंकि इस रंग को नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। मंदिर में लाल या पीला रंग करवा सकते हैं।
    • मंदिर में खंडित मूर्तियों को नहीं रखना चाहिए। अगर आपके भी मंदिर में भी खंडित मूर्तियां हैं, तो उन्हें पवित्र नदी में बहा दें।

    यह भी पढ़ें- क्या आप भी रात को सिंक में छोड़ देते हैं जूठे बर्तन? वास्तु से जानें, कैसे यह आदत रोक सकती है बरकत

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।