3 रोटियां परोसने की गलती कहीं छीन न ले घर की सुख-शांति, नोट करें भोजन से जुड़े ये जरूरी नियम
वास्तु शास्त्र के अनुसार, भोजन करना एक साधना है और इसके कुछ नियम हैं। आइए जानते हैं। ...और पढ़ें
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Vastu Tips: खाने की थाली से जुड़े जरूरी वास्तु नियम। (Ai Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति और वास्तु शास्त्र में भोजन करना केवल पेट भरना नहीं, बल्कि एक साधना मानी गई है। अक्सर आपने घर के बड़े-बुजुर्गों को टोकते हुए सुना होगा कि थाली में एक साथ 3 रोटियां नहीं रखनी चाहिए। क्या यह केवल एक अंधविश्वास है या इसके पीछे कोई गहरा तर्क? वास्तु शास्त्र के अनुसार, भोजन परोसने का तरीका आपके घर की सुख-समृद्धि और सेहत को सीधे प्रभावित करता है। ऐसे में आइए यहां भोजन से जुड़े उन महत्वपूर्ण वास्तु नियमों को जानते हैं, जिन्हें अनदेखा करना भारी पड़ सकता है।

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थाली में 3 रोटियां क्यों हैं मना?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, थाली में एक साथ तीन रोटियां परोसना अशुभ माना जाता है। इसके पीछे दो मुख्य वजह हैं -
धार्मिक वजह - ऐसा माना जाता है कि जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उसके नाम पर निकाले जाने वाले भोजन में 3 रोटियां या पूरियां रखी जाती हैं। इसलिए जीवित व्यक्ति की थाली में 3 रोटियां रखना मृत व्यक्ति के भोजन के समान माना जाता है, जो घर में नकारात्मकता लाता है।
उपाय - अगर आपको 3 रोटियों की ही भूख हैं, तो पहले 2 परोसें और बाद में 1 लें। या फिर एक रोटी को दो हिस्सों में तोड़कर रखें।
भोजन करने के वास्तु नियम
दिशा का रखें ध्यान
वास्तु के अनुसार, भोजन करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। पूर्व दिशा में मुख करके खाने से आयु बढ़ती है और सेहत अच्छी रहती है। वहीं, उत्तर दिशा की ओर मुख करने से धन और ज्ञान की प्राप्ति होती है। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह यम की दिशा मानी जाती है।
थाली में न धोएं हाथ
अक्सर लोग खाना खाने के बाद उसी थाली में हाथ धो लेते हैं। वास्तु के अनुसार, यह आदत मां लक्ष्मी और मां अन्नपूर्णा का अपमान है। ऐसा करने से घर की बरकत चली जाती है और दरिद्रता का वास होता है।
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भोजन का सम्मान करें
भोजन का कभी अपमान नहीं करना चाहिए। अगर भोजन आपकी पसंद का न भी हो, तो भी उसे भगवान का प्रसाद मानकर अच्छे मन से खाएं। दुखी मन या गुस्से से भोजन करने से शरीर को पोषण नहीं मिलता है। बल्कि इससे नकारात्मकता पैदा होती है।
जूते-चप्पल पहनकर न खाएं
भोजन हमेशा जूते-चप्पल उतारकर और जमीन पर बैठकर या डाइनिंग टेबल पर तसल्ली से करना चाहिए। चप्पल पहनकर भोजन करने से राहु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।