घर में चाहते हैं सुख-शांति? तो वास्तु के अनुसार ऐसे तय करें खिड़कियों और दरवाजों की संख्या
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए खिड़कियों और दरवाजों की संख्या सम होनी चाहिए। ...और पढ़ें

खिड़कियों और दरवाजों से जुड़े वास्तु टिप्स (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र में सुख-शांति के लिए घर की डिजाइन के बारे में विस्तार से बताया गया है। घर में ऊर्जा के प्रवाह के लिए दरवाजों और खिड़कियों की संख्या पर खास ध्यान दिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि वास्तु में बताए गए नियम के अनुसार घर में दरवाजों और खिड़कियों की संख्या होने से सकरात्मक ऊर्जा का वास होता है और नकरात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
इसलिए कहा जाता है कि घर को बनवाते समय वास्तु के नियम के बारे में जरूर जान लें, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि घर में खिड़कियों और दरवाजों की संख्या कितनी होनी चाहिए?
घर में कितनी होनी चाहिए खिड़कियां और दरवाजे
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में खिड़कियों और मुख्य दरवाजों की सम होनी चाहिए। जैसे- 2, 4, 6, 8, 12 आदि। विषम संख्या को अच्छा नहीं माना जाता है।

(Image Source: AI-Generated)
किस दिशा में होनी चाहिए खिड़कियां और दरवाजे?
वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को देवता कुबेर की मानी जाती है। इस दिशा को घर के द्वार या खिड़कियों के लिए शुभ मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में खिड़कियां और दरवाजे होने से घर में धन, समृद्धि और शांति का आगमन होता है।
वास्तु शास्त्र में ईशान कोण को भगवान का स्थान माना जाता है। इस दिशा को भी खिड़कियां और दरवाजे के लिए शुभ मानी जाती है। इस दिशा में खिड़कियां और दरवाजे होने से मानसिक शांति और घर में खुशियों का आगमन होता है।
इसके अलावा पूर्व दिशा को भी खिड़कियों और दरवाजों के लिए अच्छी मानी जाती है। इस दिशा से सूर्य उगता है। इसी वजह से इस दिशा में खिड़कियां और दरवाजे होने से सूर्य की सकारात्मक किरणें घर में आती हैं और घर में ऊर्जा बनी रहती है।
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इन बातों का रखें ध्यान
दक्षिण दिशा को यम की दिशा मानी जाती है। इसलिए इस दिशा में खिड़कियों और दरवाजों को बनवाने से बचना चाहिए। इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम दिशा को भी शुभ नहीं माना जाता है। इस दिशा खिड़कियां और दरवाजे होने से परिवार के सदस्यों को जीवन में आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ध्यान रखें कि घर का मुख्य दरवाजा बड़ा होना चाहिए और अंदर की ओर खुलना चाहिए। खिड़कियों के कांच टूटे हुए नहीं होने चाहिए।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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