क्या आप भी कर रहे हैं वास्तु और फेंगशुई को एक समझने की गलती, यहां पढ़ें इनके बीच का अंतर
वास्तु शास्त्र और फेंगशुई दोनों ही घर में सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन लाने की प्राचीन विद्याएं हैं। ...और पढ़ें

वास्तु शास्त्र और फेंगशुई के बीच है बड़ा अंतर (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
वास्तु शास्त्र भारतीय और फेंगशुई चीनी वास्तु विद्या है
दोनों की कार्यप्रणाली और उत्पत्ति में भी है बड़ा अंतर
वास्तु शास्त्र दिशाओं पर केंद्रित है और फेंगशुई ऊर्जा पर
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र और फेंगशुई दोनों ही प्राचीन प्रणालियां हैं, जो घर की ऊर्जा को संतुलित करके सुख-समृद्धि लाने का काम करती हैं। लेकिन कुछ लोग इन दोनों को एक ही समझने की भूल कर बैठते हैं।
वास्तु शास्त्र और फेंगशुई के नियम और इनकी अस्तित्व में आने के स्थान भी अलग-अलग हैं। साथ ही इन दोनों के मूल सिद्धांतों और कार्यप्रणाली में भी बड़ा अंतर है, जिसके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं।
वास्तु शास्त्र
- वास्तु शास्त्र, एक भारतीय परंपरा है, जो लगभग 6,000 ईसा पूर्व पहले अस्तित्व में आई।
- वास्तु शास्त्र मुख्य रूप से ढांचे (Structure), ज्यामिति (Geometry) और दिशाओं पर केंद्रित है।
- वास्तु शास्त्र में घर की संरचना, कमरे की दिशा और निर्माण में बदलाव पर जोर दिया जाता है।
- वास्तु शास्त्र में उत्तर और पूर्व दिशा को सबसे शुभ दिशा माना गया है।
- भारतीय वास्तु शास्त्र 5 तत्वों यानी पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश पर आधारित है।
- वास्तु शास्त्र में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बनाए रखने के लिए हल्के और प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।
- वास्तु शास्त्र में माना गया है घर के मुख्य केंद्र यानी ब्रह्मस्थान में खुलापन होना चाहिए, ताकि ऊर्जा का प्रवाह बिना किसी बाधा के हो सके।
- इसमें घर के हर स्थान के लिए विशिष्ट स्थान निर्धारित किए गए हैं, जैसे कि रसोई के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा और बेडरूम के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा को शुभ माना गया है।
फेंगशुई
- फेंगशुई चीनी वास्तु शास्त्र है, जो लगभग 960 ईसा पूर्व से अस्तित्व में है।
- इसमें ऊर्जा (Qi/Chi), वस्तुओं की स्थिति और इंटीरियर (Interior) को अधिक महत्व दिया जाता है।
- फेंगशुई में वस्तुओं जैसे विंड चाइम, कछुआ, क्रिस्टल आदि को घर में व्यवस्थित करके ऊर्जा सुधारने पर जोर दिया जाता है।
- फेंगशुई में दक्षिण और दक्षिण-पूर्व दिशा को ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है।
- फेंगशुई भी 5 तत्वों पर आधारित है, जिसमें लकड़ी, अग्नि, पृथ्वी, धातु और जल शामिल हैं।
- फेंगशुई में ऊर्जा को बढ़ाने के लिए चटक और चमकीले रंगों का उपयोग करना बेहतर माना गया है।
- फेंगशुई में संतुलन बनाने के करने के लिए यिन और यांग यानी विरोधी शक्तियों को संतुलित करने की सलाह दी जाती है।
- इसमें ऊर्जा प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए शीशे, पौधों और जल संरचनाओं जैसे फव्वारा आदि का उपयोग किया जाता है।
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