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जन्माष्टमी पर शंख, बांसुरी और मोरपंख कहां रखें? वास्तु एक्सपर्ट ने बताया सही स्थान

Updated: Thu, 27 Aug 2026 01:15 PM (IST)

जन्माष्टमी पर वास्तु विशेषज्ञ जय मदान घर की ऊर्जा को सकारात्मक बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव देती हैं। इसमें घर ...और पढ़ें

जन्माष्टमी पर घर में सकारात्मक ऊर्जा के लिए वास्तु टिप्स (Picture Credit- AI Generated)

जन्माष्टमी पर घर में सकारात्मक ऊर्जा के लिए वास्तु टिप्स (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. घर से कबाड़ हटाकर मुख्य द्वार को साफ करें

  2. शंख, बांसुरी, मोरपंख को पूजा स्थल पर सही रखें

  3. ईशान कोण में झूला स्थापित करें, सात्विक रंग उपयोग करें

जय मदान, नई दिल्ली। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव ही नहीं है, बल्कि यह मेरे दृष्टिकोण से आपके घरों की ऊर्जा को सचेत रूप से नया करने का एक सुंदर अवसर भी है। एक वास्तु विशेषज्ञ के रूप में, मेरा मानना है कि त्योहार घर से कबाड़ हटाने और रुकी हुई ऊर्जा को साफ करने के आदर्श क्षण होते हैं। जिस तरह से हम इस दिन अपने घरों को तैयार करते हैं, वह उत्सवों में गहरा अर्थ जोड़कर सकारात्मकता और समृद्धि को बढ़ाता है।

दूर भगाएं नकारात्मकता

जन्माष्टमी की वेदी (पूजा स्थल) स्थापित करने से पहलेघर के मुख्य प्रवेश द्वार, पूजा क्षेत्र और उन कोनों को साफ करें जो अप्रयुक्त रहते हैं। टूटी वस्तुएं, सूखे पौधे और बेकार सामान तुरंत हटा दें। प्रवेश द्वार मुख्य ऊर्जा बिंदु है; इसे साफ, अच्छी रोशनी वाला रखें और ताजे फूलों या रंगोली से सजाएं। शाम को दीया-धूप जलाकर माहौल सुगंधित रखें।

शुभ मांगलिक वस्तुएं

सजावट को आध्यात्मिक रूप से सार्थक बनाने के लिए शंख, बांसुरी और मोर पंख का सही उपयोग करें। शंख शुद्धिकरण का प्रतीक है, इसे सीधे फर्श पर रखने के बजाय पूजा घर में किसी साफ, ऊंचे स्थान पर रखें। बांसुरी जीवन में मधुरता और समर्पण लाती है, इसे बाल गोपाल की मूर्ति के पास रखें। मोर पंख को वेदी पर सजाएं। याद रखें, ये वस्तुएं कोई जादुई शार्टकट नहीं हैं, इनका महत्व आपकी भक्ति और उद्देश्य से है।

शुभ ईशान कोण

आधी रात को झूला झुलाने की रस्म के लिए मैं उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) को विशेष रूप से शुभ मानती हूं, क्योंकि यह आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ा है। यदि संभव हो, तो पूजा क्षेत्र या झूले को इसी शांत कोने में स्थापित करें। अनुष्ठान करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। वैसे, किसी दिशा का कड़ाई से पालन करने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण उस स्थान की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखना है।

पवित्र धातु चयन

परंपरागत रूप से अलग-अलग धातुओं की अपनी ऊर्जा होती है। चांदी पवित्रता व चंद्रमा से, तांबा जीवंतता से और पीतल शुभता व गर्मजोशी से जुड़ा है। बाल गोपाल के लिए आप अपनी सुविधा से चांदी या पीतल की मूर्ति और झूला चुन सकते हैं। हालांकि, मैं केवल धातु के कारण आपकी मौजूदा मूर्ति को बदलने का सुझाव कभी नहीं दूंगी। वास्तु और अध्यात्म में आपकी आंतरिक श्रद्धा भौतिक विचारों से हमेशा ऊपर होती है।

सात्विक रंग योजना

रंग हमारे मूड और वातावरण को गहराई से प्रभावित करते हैं। जन्माष्टमी की वेदी के लिए मैं हल्के, ताजा और सात्विक रंगों के उपयोग की सलाह देती हूं। पीला रंग ज्ञान और शुभता का प्रतीक है, सफेद रंग शांति और पवित्रता लाता है, जबकि हल्का नीला रंग श्रीकृष्ण के दिव्य जुड़ाव को दर्शाकर वातावरण को शांत बनाता है। इन छोटे-छोटे बदलावों से आप इस जन्माष्टमी अपने घर में असीम शांति का अनुभव कर सकते हैं।

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