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27 साल तक चली पशु चोरी की सुनवाई: न वादी आया न गवाह... आगरा कोर्ट ने बरी किया 55 साल का व्यक्ति

Updated: Sun, 30 Aug 2026 09:12 AM (IST)

आगरा में 27 साल पुराने पशु चोरी के मामले में आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।

HighLights

  1. आगरा में 27 साल पुराने पशु चोरी मामले में फैसला आया।

  2. आरोपी किशन को सबूतों की कमी के कारण बरी किया गया।

  3. शिकायतकर्ता और गवाह अदालत में गवाही देने नहीं पहुंचे।

जागरण संवाददाता, आगरा। रकाबगंज के कुतलूपुर पुलिया के पास 27 वर्ष पहले हुई पशु चोरी के मामले में आरोपित किशन को न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। वादी मुकदमा अदालत में गवाही देने नहीं पहुंचा, जबकि एक गवाह भी मुकर गया।

दो मई 1998 को दर्ज कराया था मुकदमा

कुतलूपुर ईदगाह निवासी चंद्र मोहन ने दो मई 1998 को थाना रकाबगंज पर तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि दोपहर करीब तीन बजे कुतलूपुर पुलिया के पास कई सुअर घूम रहे थे। तभी आटो में तीन व्यक्तियों ने एक पशु चुराकर आटो में लाद लिया। पशु की चीख सुनकर चंद्र मोहन और अन्य मुहल्ले के लोगों ने आरोपितों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। इस मामले में किशन के अलावा मोती और संजीव के विरुद्ध भी मुकदमा दर्ज हुआ था।

संजीव की हुई मुकदमे के दौरान मौत

संजीव की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई, जबकि मोती की पत्रावली अलग कर दी गई। 27 वर्षों में अभियोजन पक्ष केवल एक गवाह को ही अदालत में पेश कर सका। घटना के वादी, गवाहों और विवेचक के खिलाफ कई प्रतिकूल आदेश पारित होने के बावजूद वे अदालत में उपस्थित नहीं हुए। एकमात्र गवाह ओंकार भी अपनी गवाही से मुकर गया। जिस कारण साक्ष्य के अभाव में अदालत ने किशन को बरी कर दिया।

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