ADRDE विकसित करेगा C-295 विमान के लिए स्वदेशी हैवी ड्रॉप सिस्टम, हिमालय हो या रेगिस्तान... आसानी से उतरेगा सैन्य सामान
हवाई वितरण अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एडीआरडीई) स्वदेशी सी-295 विमान के लिए सात टन वजनी हैवी ड्राप सिस्टम विकसित करेगा। यह प्रणाली दुर्गम क्षेत्रो ...और पढ़ें

फाइल।
HighLights
एडीआरडीई सी-295 विमान के लिए हैवी ड्रॉप सिस्टम बनाएगा
यह प्रणाली सात टन तक सैन्य सामान उतार सकेगी
प्रारंभिक परीक्षण आगरा के मलपुरा ड्रापिंग जोन में होंगे
जागरण संवाददाता, आगरा। हिमालय के पर्वत हों या फिर राजस्थान का रेगिस्तान। दुर्गम क्षेत्रों में सैन्य उपकरण और सामान उतारना और भी आसान होने जा रहा है। हवाई वितरण अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एडीआरडीई) सी-295 का हैवीड्रॉप सिस्टम विकसित करेगा।
स्वदेशी विमान के लिए सात टन वजनी सिस्टम के प्रारंभिक परीक्षण मलपुरा ड्रापिंग जोन, आगरा में होंगे फिर बाकी के परीक्षण राजस्थान सहित अन्य में होंगे।
स्वदेशी विमान के लिए सात टन वजनी है सिस्टम
आगरा वायुसेना स्टेशन में मालवाहक विमान हैं। इसमें एएन-32, सी-130 जे, आइएल-78 सहित अन्य विमान शामिल हैं। नया विमान सी-295 भी हिस्सा बन चुका है। इसे 12वीं स्क्वाड्रन में शामिल किया गया है। टाटा एडवांस्ड सिम्टम्स लिमिटेड और एयरबस के सहयोग से पहला स्वदेशी सी-295 विमान तैयार हुआ है। सप्ताहभर पूर्व इसकी सफल उड़ान हुई है। यह विमान वड़ोदरा, गुजरात की फैक्ट्री में तैयार हुआ है। 39 और विमान तैयार होंगे। यह विमान पूरी तरह से स्वदेशी होंगे।
दुर्गम क्षेत्रों में सैन्य उपकरण और सामान उतारने में मिलेगी मदद
इन विमानों के लिए हैवी ड्रॉप सिस्टम एडीआरडीई द्वारा विकसित किया जाएगा। हैवी ड्राप सिस्टम पैराशूट का समूह होता है। इसमें एक लोहे का प्लेटफॉर्म होता है जिसमें अधिकतम सात टन वजन का सामान रखा जा सकता है। सिस्टम में ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस) सहित अन्य उपकरण लगे होंगे। इससे हैवी ड्रॉप सिस्टम निर्धारित जगह पर उतरता है।
एडीआरडीई द्वारा इससे पूर्व एएन-32, सी-130 जे विमानों के लिए हैवी ड्रॉप सिस्टम विकसित कर चुका है। इसमें पी-7, पी-16 व पी-20 टन शामिल है।
स्वदेशी सी-295 विमान की खासियत यह है कि इस विमान का प्रयोग पैराट्रूपर के छलांग लगाने के लिए भी किया जा सकता है। यह मालवाहक विमान है ऐसे में हैवी ड्रॉप सिस्टम तैयार होना जरूरी है। खासकर आपदा या फिर अन्य आपातकाल में इसका प्रयोग किया जा सकेगा। यह विमान छोटे रनवे में उतर सकता है।
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यह है हैवी ड्रॉप सिस्टम
इसमें तीन से पांच पैराशूट का समूह होता है। यह सभी पैराशूट एक लोहे के प्लेटफार्म से चार कोने में रस्सी से बंधे होते हैं। इसमें नैवीगेशन सिस्टम से लेकर जीपीएस लगा होता है। इससे यह सटीक जगह पर उतरता है।