मॉल में घंटों के हिसाब से केबिन, आगरा में सदर बाजार का नंद प्लाजा होगा सील, सात पर मुकदमा दर्ज
आगरा के सदर स्थित नंद प्लाजा को पुलिस सील करने की तैयारी में है, जहां कैफे और मिनी मूवी स्टेशन के अंधेरे केबिनों में अनैतिक गतिविधियां चल रही थीं। पुल ...और पढ़ें

नंद प्लाजा से युवक-युवतियों को बाहर लेकर आती पुलिस।
जागरण संवाददाता, आगरा। सदर स्थित नंद प्लाजा पर पुलिस सील लगाने की तैयारी कर रही है। यहां के कैफे और मिनी मूवी स्टेशन में बने अंधेरे केबिनों में अनैतिक गतिविधियों का संचालन हो रहा था। पुलिस ने हाल ही में छापे के दौरान इन केबिनों से आपत्तिजनक वस्तुएं बरामद की थीं। हालांकि, मौके पर पकड़े गए युवक-युवतियों को छोड़ दिया गया।
लेकिन सात संचालकों के खिलाफ अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। गुरुवार को चार आरोपितों, भूपेंद्र कुमार दिवाकर, अनुज शर्मा, पुष्पेंद्र सिंह और शोएब को जेल भेज दिया गया। पुलिस ने बुधवार को एलआइयू की सूचना पर नंद प्लाजा माॅल में छापा मारा था। सदर थाने में एसीपी ताज सुरक्षा यतेंद्र सिंह नागर ने मुकदमा दर्ज कराया है।
जिसमें भूपेंद्र कुमार दिवाकर, अनुज शर्मा, पुष्पेंद्र सिंह, शोएब, नरेंद्र सिंह, रविंद्र और सौरभ यादव नामजद हैं। पुलिस ने द रैंप मिनी प्लेक्स, द रैंप कैफे, बरिस्ता कैफे, कैव मिनी प्लेक्स, द रैपिड कैफे, मैक्स सिनेमाज और रैपिड मूवी स्टेशन में छापे मारे। इन केबिनों से 11 प्रेमी जोड़ों को पकड़ा गया और तलाशी के दौरान प्रयोग किए हुए कंडोम भी मिले।
स्थानीय लोगों ने पुलिस को बताया कि ये कैफे और मिनी प्लेक्स केवल दिखावे के लिए खोले गए थे, जबकि केबिनों का उपयोग गलत काम के लिए किया जाता था। युवक-युवतियों को घंटे के हिसाब से केबिन दिए जाते थे।
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पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि एलआइयू की सूचना पर संयुक्त टीम बनाकर कार्रवाई की गई है। सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिया गया है कि यदि उनके क्षेत्र में ऐसे कैफे संचालित हैं, तो उन्हें तुरंत बंद कराया जाए।
आयुक्त ने बताया कि कमिश्नरेट में डीसीपी के पास मजिस्ट्रेटी शक्तियां हैं, जिनका उपयोग करते हुए नंद प्लाजा को सील किया जाएगा। इस परिसर के पास मंदिर और स्कूल हैं, और वहां चल रही अवैध गतिविधियों से स्थानीय लोग परेशान थे।
पुलिस बना रही दुकान मालिकों की सूची
पुलिस अब दुकानों के मालिकों की सूची बना रही है। कई दुकानें बिक चुकी हैं और नए मालिक उनका किराया ले रहे हैं। नए मालिकों को भी पता था कि इन दुकानों में केबिन चलते हैं, फिर भी उन्होंने इसे बंद नहीं कराया। इस कार्रवाई के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। एलआइयू ने पुलिस आयुक्त को गोपनीय रिपोर्ट भेजी है, जिसमें पुलिस की मिलीभगत का जिक्र किया गया है।
माॅल में आठ वर्ष पहले बनाए गए केबिनों की शुरुआत बरिस्ता कैफे से हुई थी। 2018 में बनाए गए इन केबिनों का उद्देश्य अवैध कमाई का साधन बनना नहीं था, लेकिन बाद में अन्य दुकानों ने भी इसी तरह के केबिन बना लिए। सदर और ताजगंज में कई ऐसे कैफे चल रहे हैं, जहां युवक-युवतियों को घंटों के हिसाब से केबिन दिए जाते हैं।