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    आगरा में जन्मजात टेढ़े पैर का पोनसेटी तकनीक से हुआ इलाज, 95 प्रतिशत बच्चे हुए ठीक

    Updated: Sun, 19 Jul 2026 08:11 PM (IST)

    आगरा में जन्मजात टेढ़े पैर के इलाज में पोनसेटी तकनीक से शानदार सफलता मिली है। इस अध्ययन में 331 बच्चों में से 95 प्रतिशत सामान्य बच्चों की तरह चलने मे ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

    प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

    HighLights

    1. एसएन मेडिकल कॉलेज में पोनसेटी तकनीक से इलाज।

    2. 331 बच्चों में 95 प्रतिशत हुए पूरी तरह ठीक।

    3. जन्म के 7-10 दिन बाद इलाज शुरू करना प्रभावी।

    जागरण संवाददाता, आगरा। जन्मजात टेढ़े पैर की समस्या से पीड़ित नवजात सामान्य बच्चों की तरह चल सकते हैं। सात से 10 दिन के नवजात का पोनसेटी तकनीक से इलाज शुरू कर दिया जाए तो छह महीने में 95 प्रतिशत बच्चों का पैर सीधा हो सकता है। एसएन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 331 बच्चों पर की गई स्टडी में पोनसेटी तकनीक से इलाज के अच्छे नतीजे सामने आए हैं।

    एक हजार में से एक बच्चे में जन्मजात पैर टेढ़े होने की समस्या होती है। मगर, इसका इलाज नहीं कराया जाता है। उम्र बढ़ने के साथ यह समस्या और बढ़ने लगती है। इसके बाद मेजर सर्जरी करने से भी पैर पूरी तरह से ठीक नहीं होता है।

    इसके लिए एसएन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में वर्ष 2023 से 2026 तक जन्मजात टेढ़े पैर से पीड़ित 331 बच्चों पर पोनसेटी तकनीक से इलाज पर स्टडी की गई।

    अस्थि रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. अमृत गोयल ने बताया कि 331 में से 219 बच्चों के दोनों पैर और 112 बच्चों का एक पैर टेढ़ा था। इसमें से अधिकांश बच्चों का जन्म एसएन में ही हुआ था, पैर टेढ़े होने पर अस्थि रोग विभाग में रेफर कर दिए गए। जन्म के सात से 10 दिन बाद पोनसेटी तकनीक से इलाज शुरू किया गया।

    इस तकनीक से बच्चे के पैर को खींचकर सीधा करने के बाद प्लास्टर लगा दिया गया, 15 दिन बाद प्लास्टर हटाया गया, इसके बाद फिर से पैर को खींच कर सीधा किया गया और प्लास्टर लगाया गया। नवजात के पैर की हड्डिया और मांसपेशियां लचीली होती हैं इसलिए इन्हें सीधा करने में समस्या नहीं आती है।

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    इस तरह आठ से 10 प्लास्टर लगाए गए। इससे पैर लगभग सीधा हो गया, प्लास्टर ना लगाने पर भी पैर सीधा रहे इसके लिए 77 प्रतिशत बच्चों में एड़ी के पीछे के सख्त टेंडन को लंबा करने के लिए कट लगाया गया और फिर से प्लास्टर कर दिया गया। एक महीने बाद प्लास्टर को हटा दिया गया। इसके बाद बच्चे को ब्रेस लग हुए स्पेशल बूट छह महीने तक पहनाए गए।

    बूट पहनने का समय लगातार कम किया गया, दिन की जगह रात में सोते समय बूट पहनाए गए। दो से तीन वर्ष की आयु तक 95 प्रतिशत बच्चों के पैर पूरी तरह से सीधे हो गए, वे सामान्य बच्चों की तरह चलने के साथ ही खेलकूद गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं।

    आनुवांशिक कारण के साथ गर्भाशय में जगह कम होने पर टेढ़े पैर की समस्या

    माता पिता के साथ ही परिवार में किसी को भी टेढ़े पैर की समस्या है उन बच्चों में आनुवांशिक कारण से यह समस्या हो सकती है। इसके साथ ही गर्भाशय में जगह कम होने पर गर्भस्थ शिशु के पैर मुड़ जाते हैं इससे भी यह समस्या हो रही है। न्यूरोमस्कुलर समस्याओं के कारण भी टेढ़े पैर हो सकते हैं।