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    अब जूते के कच्चे माल पर नहीं लगेगा इम्पोर्ट शुल्क, आगरा के व्यापारियों को मिलेगी राहत

    Updated: Mon, 02 Feb 2026 03:20 PM (IST)

    बजट में जूता उद्योग को बड़ी राहत मिली है, खासकर निर्यात के लिए जूता अपर के आयात पर अब कोई शुल्क नहीं लगेगा। इससे आगरा के जूता व्यापारियों को लाभ होगा, ...और पढ़ें

    जूता कच्चा माल आयात शुल्क मुक्त।

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    जागरण संवाददाता, आगरा। अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के कारण जूता इंडस्ट्री बुरी तरह प्रभावित है। ऐसे में नई देशों से करार और अमेरिका से ट्रेड डील का इंतजार था। वहीं आम बजट से जूता कंपोनेंट के निश्शुल्क आयात की मांग को स्वीकार में जूता अपर को आयात शुल्क से राहत दी है। वहीं आयात वाले कंपोनेंट से निर्यात किए जाने वाले उत्पादों के लिए समय सीमा छह महीने से बढ़ाकर एक वर्ष कर दी गई है।

    इंट्रेस्ट सबमेंशन को दो से तीन प्रतिशत किया है और एमएसएमई एवं मध्यम उद्योगों के लिए पैकेज राहत की उम्मीद है। वहीं टैरिफ से प्रभावित चल रहे जूता निर्यातकों को बड़ी राहत की आस थी, जो पूरी नहीं हो सकी है।

    आगरा का जूता 70 से अधिक देशों में अपनी चमक बिखेर रहा है। चार हजार करोड़ से 3800 करोड़ पर पहुंच चुके निर्यात में से टैरिफ की मार के कारण 300 करोड़ का निर्यात बाधित हो गया है। नुकसान की भरपाई के लिए फोकस प्रोडक्ट लाइसेंस जारी करने की मांग की जा की गई थी।

    जूता निर्यातक प्रकाश मोरानी का कहना है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए मानक, ब्याज नियम भी उनके जैसे बनाने की मांग थी। ब्याज दर आठ से नौ प्रतिशत है, जिस पर कारोबार करने में मुश्किल होती है। घरेलू बाजार को भी लेदर आयात पर 10 प्रतिशत शुल्क में राहत और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम का लाभ देने की मांग भी लंबे समय से है।

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    इसमें से कुछ नहीं मिल सका है। जूता उद्यमी विपिन गुप्ता का कहना है कि उच्च गुणवत्ता के लेदर के लिए आयात शुल्क घरेलू बाजार के लिए माफ करने की मांग थी, जो पूरी नहीं हुई। अपर आयात का लाभ भी निर्यातकों को मिलेगा। एमएसएमई इकाई का 45 दिन में भुगतान को लेकर भी कोई निर्णय नहीं हुआ है।बजट मुख्य रूप से अर्थव्यवस्था को गति देने वाला है।

    इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े निवेश के माध्यम से विकास को मजबूती दी गई है और वित्तीय घाटे को 4.3 प्रतिशत तक सीमित रखकर सरकार ने वित्तीय अनुशासन का स्पष्ट संदेश दिया है।

    साथ ही, कॉरपोरेट टैक्स में आगे कमी कर उद्योग और निवेश को प्रोत्साहन दिया गया है। रोजगार सृजन के दृष्टिकाेण का बजट में एमएसएमई सेक्टर पर विशेष फोकस किया है। टेक्सटाइल के साथ-साथ लेदर और फुटवियर उद्योग के निर्यात को बढ़ावा देने वाले महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

    आईजीसीआर स्कीम के अंतर्गत इनपुट्स की सूची का विस्तार किया गया है, जिसके तहत अब जूते के अपर के निर्यात के लिए बिना ड्यूटी आयात की सुविधा उपलब्ध होगी। यह निर्णय लेदर और फुटवियर उद्योग की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत को और मजबूत बनाएगा। -पूरन डावर, जूता निर्यातक, चेयरमैन, डेवलपमेंट काउंसिल फार फुटवियर एंड लेदर इंडस्ट्री।

    टैरिफ से निर्यात बाधित है। इंस्ट्री को ग्रोथे के लिए इंसेंटिव, उद्यमियों के लिए नए नियम, बड़ी इंडस्ट्री लगाने पर राहत, सस्ता बैंक लोन सहित दूसरी मांग की गई थी। इसमें से कुछ भी नहीं मिल सका है। निर्यात के लिए अपर के आयात पर मिली राहत से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। लेदर आयात शुल्क पर पहले से राहत थी। स्टाक मार्केट में आई बड़ी गिरावट आड़ियन पोल है। -नजीर अहमद, जूता निर्यातक।

    सिंथेटिक अपर के आयात पर शुल्क मुक्त होने से निर्यात में वृद्धि होगी। इससे स्पोेर्ट्स इंडस्ट्री को ग्रोथ करने में मदद मिलेगी। विभिन्न देशों में अब स्पोर्ट्स शूज की मांग में वृद्धि हुई है। कुछ और राहत की उम्मीद थी, जिससे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मदद मिलती। वहीं अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के लिए फोकस प्रोडक्ट लाइसेंस जारी करने की मांग थी, जो पूरी नहीं हुई। -आशीष जैन, जूता निर्यातक।

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