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    सोने-चांदी के भाव बढ़े: शादियों में लाइट वेट ज्वैलरी की मांग, आगरा में 20 को मनेगी अक्षय तृतीया

    Updated: Wed, 15 Apr 2026 10:21 AM (IST)

    सहालग और अक्षय तृतीया (20 अप्रैल) पर खरीदारी में वृद्धि की उम्मीद है। पिछले वर्ष की तुलना में दाम अधिक होने के बावजूद, हल्की गिरावट और स्थिरता से ग्रा ...और पढ़ें

    एमजी रोड स्थित तनिष्क शोरूम पर ज्वेलरी पंसद करती ग्राहक। जागरण

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    संक्षेप में पढ़ें

    जागरण संवाददाता, आगरा। सोने-चांदी के बढ़े भाव ने बाजार में लाइट वेट ज्वैलरी की मांग बढ़ा दी है। ज्वैलर्स ने लोगों के बजट के हिसाब से लाइट वेट ज्वैलरी तैयार कराई हैं। आधुनिक तकनीकी से बन रही यह ज्वैलरी दिखने में तो भारी है, लेकिन वजन में हल्की है।

    पहले जो हार 60 से 70 ग्राम में बनता था, वही अब 25 से 30 ग्राम में बनाया जा रहा है। सहालग में खरीदारी बढ़ी है। अक्षय तृतीया पर सोने की खरीदारी शुभ मानी जाती है, जिससे बिक्री में और वृद्धि होने की उम्मीद सराफा कारोबारी जता रहे हैं।

    सहालग में हो रही है आभूषणों की खरीदारी, 20 अप्रैल को है अक्षय तृतीया

    अक्षय तृतीया इस बार 19 व 20 अप्रैल को है। उदया तिथि के अनुसार 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। अक्षय तृतीया पर सोने की खरीदारी को शुभ माना जाता है।

    • अक्षय तृतीया सोने की खरीदारी में अचानक उछाल आता है।
    • यह पूरे वर्ष में होने वाली बिक्री का बड़ा हिस्सा हाेता है।
    • पिछले वर्ष अक्षय तृतीया (30 अप्रैल) को आगरा में सोना करीब 95 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब 95 हजार रुपये प्रति किग्रा थी।
    • सोने-चांदी के दामों में इसके बाद काफी उछाल देखने को मिला था।
    • जनवरी, 2026 में चांदी रिकॉर्ड 4.10 लाख रुपये प्रति किग्रा और सोना करीब 1.85 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था।
    • इसके बाद चांदी और सोने के दाम में गिरावट आई।

    आधुनिक तकनीकी से बन रही ज्वैलरी दिखने में भारी और वजन में हल्की

    इन दिनों दोनों स्थिर बने हुए हैं। 11 अप्रैल को सोना करीब 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.42 लाख रुपये प्रति किग्रा थी। पिछले वर्ष की अपेक्षा सोने के दाम अभी भी अधिक हैं, लेकिन हल्की गिरावट और दरें स्थायी होने से खरीदारी का रुझान बढ़ा है। ग्राहक निवेश और डिजाइन दोनों का विचार कर खरीदारी कर रहे हैं।

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    लाइट वेट ज्वैलरी के साथ रेग्यूलर और ट्रेंडिंग ज्वैलरी को पसंद

    पहले दुल्हन के लिए भारी सेट लिए जाते थे, लेकिन अब हल्के वजन वाले और सुविधाजनक आभूषण पसंद किए जा रहे हैं। नई तकनीकी के उपयोग से ज्वैलरी का वजन भले कम हो, लेकिन वह दिखने में भारी लगती है। लाइट वेट ज्वैलरी के साथ रेग्यूलर और ट्रेंडिंग ज्वैलरी को पसंद किया जा रहा है।

    10 हजार की पायल 25 हजार की

    एक वर्ष पहले तक 100 ग्राम चांदी की पायल करीब 10 हजार रुपये में आ जाती थी। चांदी की कीमतों में प्रतिदिन हो रहे उतार-चढ़ाव के चलते 100 ग्राम चांदी की पायल अब करीब 25 हजार रुपये में आ रही है। 10 हजार रुपये की पायल खरीदने वाला सामान्य आदमी 25 हजार रुपये की पायल नहीं ले पा रहा। वह 60 से 70 ग्राम वजन की पायल चाह रहा है। इसे देखते हुए सराफा कारोबारियों ने हल्के वजन की पायल तैयार कराई हैं।

    समय के साथ आए बदलाव

    1. पहले केवल सोने के आभूषण खरीदे जाते थे, अब उसके डिजाइन के साथ पहनने के बाद कैसा लगेगा पर भी विचार किया जा रहा है।
    2. पहले भारी आभूषणों में निवेश किया जाता था, अब हल्के वजन वाले आभूषण पसंद किए जा रहे हैं।
    3. पहले आभूषण शादी तक सीमित थे, लेकिन अब यह त्योहार, उपहार और सेल्फ स्टाइलिंग के लिए खरीदे जा रहे हैं।


    'बाजार का रुख सकारात्मक है। पिछले वर्ष की तुलना में मांग में सुधार दिख रहा है। अक्षय तृतीया से पूर्व सोने के दाम में हल्की नरमी आई है, जिससे खरीदारी बढ़ी है। अप्रैल से जुलाई तक सहालग और त्योहार मिलकर दोहरी मांग पैदा कर रहे हैं। -रोहिन हेमदेव, लक्ष्मण दास ज्वैलर्स'

    'बैसाख में अधिक शादियां होने से ज्वैलरी की सर्वाधिक बिक्री होती है। इस बार साया अधिक होने से पिछले वर्ष की अपेक्षा बाजार में अधिक मांग है। लाइट, मिडिल और हैवी वेट के साथ रेग्यूलर और ट्रेंडिंग ज्वैलरी पसंद की जा रही है। -अनुराग बंसल, तनिष्क शोरूम एमजी रोड'

    'बैसाख में फसल की बिक्री के बाद किसान बेटे-बेटियों की शादियां और आभूषण की खरीदारी करते थे। बाजार इस बार बहुत डाउन है। 50 प्रतिशत भी बिक्री नहीं है। इसकी मुख्य वजह सोना-चांदी की कीमतों में अधिक वृद्धि होना है। -नितेश अग्रवाल, अध्यक्ष आगरा सराफा एसोसिएशन'

    'सोने-चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव अधिक है। पूर्व की अपेक्षा मूल्य अधिक हो गया है, जिससे बाजार हल्का है। सहालग की मांग है। सीजन में धनराशि के मामले में तो पिछली बार के स्तर तक पहुंच जाएंगे, लेकिन मात्रा तक नहीं पहुंच सकेंगे। -ब्रजमोहन रैपुरिया, अध्यक्ष आगरा सराफा मैन्यूफैक्चरिंग एसाेसिएशन'

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