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    आगरा का महाराजा सूरज मल इंटर कॉलेज: 12वीं तक के स्कूल में सिर्फ 11 स्टूडेंट्स, प्रिंसिपल सहित सात टीचर

    Updated: Sun, 02 Aug 2026 01:16 PM (IST)

    आगरा के महाराजा सूरज मल इंटर कॉलेज में 1965 में स्थापित होने के बावजूद केवल 11 छात्र नामांकित हैं, जबकि प्रधानाचार्य सहित सात शिक्षक हैं। विद्यालय में ...और पढ़ें

    राजा मंडी जाट हाउस स्थित महाराजा सूरज मल इंटर कालेज। जागरण

    राजा मंडी जाट हाउस स्थित महाराजा सूरज मल इंटर कालेज। जागरण

    HighLights

    1. महाराजा सूरज मल कॉलेज में सिर्फ 11 छात्र नामांकित

    2. 20 साल से बिजली और पानी की सुविधा नहीं

    3. सात शिक्षक 11 छात्रों को पढ़ाने के लिए नियुक्त

    जागरण संवाददाता, आगरा। राजा मंडी जाट हाउस स्थित महाराजा सूरज मल इंटर कॉलेज की स्थिति अधिक चिंताजनक है। 1965 में स्थापित इस निजी सहायता प्राप्त विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक एक भी छात्र का नामांकन नहीं हुआ है। कक्षा छह से दस तक केवल 11 छात्रों का नामांकन है, जबकि 11वीं और 12वीं कक्षा के लिए भी कोई नामांकन नहीं है।

    शिक्षकों का कहना है कि विद्यालय में न तो बिजली है और न ही साफ पीने के पानी की व्यवस्था, जिसके कारण बच्चों का नामांकन लगातार गिरता जा रहा है। वर्तमान में 11 छात्रों को पढ़ाने के लिए प्रधानाचार्य सहित सात शिक्षक नियुक्त हैं

    वर्ष 1965 में स्थापित हुए स्कूल में वर्तमान में पढ़ रहे हैं सिर्फ 11 बच्चे

    प्रधानाचार्य सीमा सिंह ने बताया कि उन्होंने एक अप्रैल से विद्यालय का कार्यभार संभाला है। पिछले 20 वर्षों से विद्यालय में स्थायी बिजली कनेक्शन नहीं है। पुराने बिजली बिल के भुगतान को लेकर विवाद चल रहा है। चुनाव या बोर्ड परीक्षा के समय अस्थाई बिजली लगाई जाती है, लेकिन उसके बाद इसे काट दिया जाता है।

    सुविधाओं की कमी के कारण कक्षा एक से पांच तक नामांकन शून्य

    गर्मी के मौसम में शिक्षक हाथ के पंखे से काम चलाते हैं। कागजों में बिजली और हैंडपंप की व्यवस्था दर्ज है, लेकिन वास्तविकता इससे भिन्न है। उन्होंने पानी की टंकी रखवाई है और आवश्यकता पड़ने पर आओ पानी के कंटेनर की व्यवस्था कराई जाती है। जिला विद्यालय निरीक्षक को कई बार पत्र लिखकर बिजली और पानी की मांग की जा चुकी है।

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    सूत्रों के अनुसार, पूर्व प्रधानाचार्य ऋषिपाल त्यागी ने सुविधाएं जुटाने के लिए कोई उचित प्रयास नहीं किए। अभिभावकों को भी आश्वासन नहीं दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप नामांकन में गिरावट आई है। शिक्षकों का वेतन सरकार द्वारा दिया जाता है, लेकिन रखरखाव और मूलभूत सुविधाओं की जिम्मेदारी प्रबंधन समिति की होती है।

    बच्चों के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़

    शहर के बीच स्थित इस विद्यालय में पिछले 20 वर्षों से बिजली नहीं पहुंची है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय भेजना बंद कर रहे हैं। कागजों में विद्यालय का संचालन हो रहा है, लेकिन बच्चों के लिए न बिजली है और न पानी।

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    प्रबंध समिति की जानकारी नहीं

    विद्यालय के रखरखाव की जिम्मेदारी प्रबंध समिति की होती है। प्रधानाचार्य का कहना है कि प्रबंध समिति का पता नहीं है। संचालन को लेकर कोर्ट में मामला चल रहा है। यदि समिति ध्यान दे तो समस्याएं सुलझ सकती हैं।

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    इस पूरे मामले की रिपोर्ट हमने डीएम साहब को भेज दी है। बच्चों के आरओ पानी की व्यवस्था के लिए प्रिंसिपल को निर्देशित किया गया है। सुविधाएं बढ़ाने के साथ-साथ नामांकन बढ़ाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

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    रविंद्र पाल सिंह तोमर, जिला विद्यालय निरीक्षक